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जनपद में कितना घटा-बढ़ा जलस्तर? लखनऊ में जान लेंगे इंजीनियर

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भूगर्भ जल विभाग की तरफ से जनपद में छह स्थानों पर कराए जा रहे बोरिंग
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बोरिंगों में पीजो मीटर वेल लगाकर इंटरनेट से जोड़ी जाएगी

अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
अब लखनऊ में बैठ कर ही पता लगाया जा सकेगा कि जनपद में भूमिगत जल स्तर कितना घटा है या कितना बढ़ा है? पीजो मीटर वैल से इंटरनेट के जरिए लखनऊ में बैठे इंजीनियर इसकी जानकारी कर सकेंगे। जल स्तर की जानकारी के लिए भूगर्भ जल विभाग की तरफ से बोरिंग कराए जा रहे हैं। वन विभाग के जटीवन और विकास भवन समेत छह स्थानों पर बोरिंग हो रहे हैं। बोरिंग 700 फीट गहरे कराए जाएंगे।
पिछले एक दशक से बारिश बेहद कम होती जा रही है। जिसके चलते तालाब ही नही नदियां भी सूख गईं हैं। नदियों वाले स्थानों पर कहीं मकान खड़े हैं तो कहीं पर खेती की जा रही है। घट रही बरसात के कारण जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। कई जनपद ऐसे हैं, जिनमें पुराने नलकूपों और बोरिंगों ने पानी उगलना बंद कर दिया। कुछेक बोरिंग बहुत कम पानी उगल रहे हैं। भूड़ के क्षेत्रों में दोबारा बोरिंग कराने पड़ गए। यदि ऐसे ही हालत रहे तो पेयजल का संकट गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। घट रहे भूमिगत जल स्तर ने भूगर्भ जल विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जल स्तर की लगातार रिपोर्ट लेने के लिए भूगर्भ जल विभाग की तरफ से कवायद शुरू की गई। जनपद में छह स्थानों पर बोरिंग कराए जा रहे हैं। 700 फिट गहरे बोरिंगों में पीजो मीटर वेल लगाई जाएगी, पीजो मीटर वेल का संबंध सीधे इंटरनेट से होगा। इंटरनेट से जुड़े होने के कारण लखनऊ में बैठे इंजीनियर जल स्तर की लगातार रिपोर्ट ले सकेंगे।
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इन स्थानों पर कराए जा रहे हैं बोरिंग
सुपरवाइजर राकेश कुमार ने बताया कि भूगर्भ जल विभाग की तरफ से जल स्तर की जानकारी के लिए 700 फीट गहरे बोरिंग कराए जा रहे हैं। बोरिंग की तली में पीजो मीटर वैल लगाई जाएगी। यह इंटरनेट से जोड़ी जाएगी। जनपद में छह स्थानों पर बोरिंग कराए जा रहे हैं। प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय जटीवन, जोया ब्लाक परिसर, डिडौली के सुशीला देवी इंटर कालेज, गंग नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता, रजबपुर के प्राथमिक विद्यालय और विकास भवन में बोरिंग कराए जा रहे हैं।
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इन नदियों में की जा रही खेतीबाड़ी
जनपद में सोत, बान, बगद और यगद नदी प्रवाहित होती थीं। मटीपुरा निवासी एवं प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह, सिमथला के सुरेंद्र सिंह त्यागी, शकरगढ़ी के खलील चौधरी, फराइम चौधरी, आदमपुर के नरेश कुमार, दौरारा निवासी राजवीर सिंह त्यागी, गांगटकोला के पूर्व प्रधान जगत सिंह, एबजाबाद के नरेंद्र सिंह, नन्हेड़ा अल्यारपुर के सोमपाल सिंह गुर्जर आदि ग्रामीणों का कहना है कि इन नदियों में हमेशा पानी बहता था। इससे आस पास के लोग प्यास बुझाने के साथ ही फसलों की सिंचाई करते थे। पशुओं को नहलाते थे। मगर अब नदियों की जमीन पर अतिक्रमण है। आस पास के किसान इनमें खेती कर रहे हैं।
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