बिजनौर में केंद्र सरकार आगामी कुछ सालों में भले ही किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रही हो, लेकिन वर्तमान में जिले के आंकड़े कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। वर्तमान में जिले किसानों ने केवल तीन महीने में ही 1200 करोड़ का कर्जा बैंकों से ले लिया है। इस पर करीब 11 करोड़ रुपये का प्रीमियम बीमा कंपनियों की गोद में जा चुका है।
खेती जिले की लाइफ लाइन है, इसलिए किसानों को खेती से जुड़े कार्यों पर ऋण देना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में बैंकों द्वारा किसानों को 3200 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन वित्तीय वर्ष के शुरू के तीन महीनों अप्रैल से लेकर जून तक ही किसानों ने करीब 1200 करोड़ रुपये का ऋण बैंकों से ले लिया है। यानि प्रतिदिन किसानों ने बैंकों से सवा 13 करोड़ से भी अधिक का ऋण लिया है।
खरीफ की फसलों के लिए यह ऋण लिया गया है। इस ऋण पर किसानों से करीब 11 करोड़ का प्रीमियम भी काटा जा चुका है। इसके अलावा भी किसानों ने साहूकारों व अन्य माध्यमों से कर्जा लिया है। यह हाल भी तब का है जब शुगर मिलें चल रही थीं और किसानों का भुगतान भी समय-समय पर हो रहा था। भाकियू जिलाध्यक्ष ठाकुर राम अवतार सिंह के अनुसार किसान बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। कर्ज के बोझ तले किसान दबता जा रहा है। किसान बहुत सोच समझकर ऋण लें। फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने व गन्ने पर काटा गया प्रीमियम वापस कराने के लिए भाकियू संघर्ष कर रही है।