ज्ञानपुर/गोपीगंज। माधोसिंह-रामबाग रेलखंड पर लगभग 800 करोड़ की लागत से चल रहे दोहरीकरण-विद्युतीकरण के चार चरणों का कार्य पूरा हो चुका है। अब पांचवें और अंतिम चरण में लगभग 300 करोड़ की लागत से गंगा नदी पर ब्रिज बनाया जाना है। इसके बनते ही माधोसिंह-रामबाग रेलखंड पर बाधित ट्रेनों का संचालन आरंभ हो जाएगा। इससे बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 120 किमी रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण-विद्युतीकरण होना है। इसमें 50 फीसदी से अधिक कार्य जिले में चल रहा है। बुधवार को संरक्षा आयुक्त उत्तर-पूर्वी परिक्षेत्र मोहम्मद लतीफ खान संरक्षा निरीक्षण कर ओपनिंग करेंगे। रेल विकास निगम ने तीन वर्ष पूर्व लगभग 800 करोड़ की लागत से माधोसिंह-रामबाग रेल खंड पर 120 किलोमीटर दोहरीकरण, विद्युतीकरण का कार्य शुरू कराया था। वाराणसी से हंडिया तक कार्य पूर्ण होने के बाद ट्रेनों का परिचालन आरंभ हो चुका है। चौथे चरण में रामनाथपुर से झूंसी तक का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। माधोसिंह-रामबाग रेलवे ट्रैक का 50 फीसदी से अधिक भाग भदोही जिले से होकर वाराणसी और प्रयागराज को जोड़ता है। इसमें लगभग 400 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। आखिरी चरण में दारागंज में गंगा नदी पर रेलवे ब्रिज का निर्माण होना है। इसके पूरा होते ही 800 करोड़ की परियोजना पूरी हो जाएगी। जनसंपर्क अधिकारी रेल मंडल वाराणसी अशोक कुमार ने बताया कि माधोसिंह-रामबाग रेलखंड पर दोहरीकरण-विद्युतिकरण के चार चरणों का कार्य पूरा हो चुका है। बुधवार को रेल संरक्षा आयुक्त उत्तर-पूर्वी परिक्षेत्र मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण एससी श्रीवास्तव अन्य अधिकारियों के साथ विशेष सैलून को अधिकतम गति से दौड़ाकर स्पीड ट्रायल लेंगे। इसके बाद इसका संचालन शुरू हो सकेगा।