ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 546 ग्रामसभाओं में काम के बहाने प्रशासकों ने खजाने को खाली कर दिया। डीघ ब्लॉक में 45 लाख के घपले में फंसे एडीओ पंचायत तो बानगी भर है। पांच अन्य ब्लॉकों में जांच हुई तो कइ प्रशासक, सेक्रेटरी और विकास भवन में बैठे अधिकारी तक की गर्दन फंस सकती है। 25 दिसंबर को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर छह ब्लॉक के 546 गांवों में पंचायत भवन, शौचालय, सामुदायिक शौचालय समेत अन्य विकास कार्यों की देखरेख के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया गया था। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद नए प्रधानों के कार्यभार ग्रहण करने पर प्रशासक हटे, हालांकि इस दौरान चुुनावी भीड़ में प्रशासकों ने जमकर खेल किया। ताजा मामला डीघ ब्लॉक से जुड़ा है। यहां के सहायक विकास अधिकारी पंचायत ने निलंबित सचिव के एफटीओ से 11 ग्राम पंचायतों में 45.33 लाख का घोटाला कर लिया। अकेले खास फर्म शिव शक्ति को एक मुश्त 33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। दूसरे ब्लॉकों में भी जांच हुई तो कई मामले सामने आ सकते हैं। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर एडीओ पंचायत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोइरौना थाने में तहरीर दी गई है। थाना प्रभारी खुर्शीद अंसारी ने कहा कि जांच की जा रही है। सोमवार को मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सूत्रों की माने तो गड़बड़झाले में विकास भवन के कुछ अधिकारी भी संलिप्त हैं। अगर निष्पक्ष जांच हुई तो उनकी भी गर्दन फंस सकती है। सीडीओ ने कहा कि दूसरे ब्लॉक के बीडीओ से प्रशासकों के कार्यकाल का लेखाजोखा मांगा गया है। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी कार्रवाई होगी।