ज्ञानपुर। कालीन नगरी में वैश्विक महामारी का मंजर याद करके आज भी लोग सिहर जाते हैं। अपनों को खोने वाले उस दौर को याद कर फफक पड़ते हैं। यह एक ऐसा दौर था जहां अपने भी पराए दिखते थे। सभी ने इस महामारी के खिलाफ जंग में सहयोग दिया और कोरोना की रफ्तार थम गई।
वैश्विक महामारी में स्वास्थ्य कर्मी ढाल की तरह खड़ेे रहे। वैक्सीनेश शुरू हुआ तो तमाम अफवाहें भी सामने आईं। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन को सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थाओं का भी सहयोग मिला। सामाजिक संस्थाएं लोगों को गांव गिराव में वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक करती रहीं। शिक्षण संस्थाएं या स्कूल प्रबंधन के लोग छात्र छात्राओं केे व्हाटसएप्प पर मैसेज भेज कर वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करते थे। जागरूकता का असर रहा कि अब पहली डोज लेने वालों की संख्या शत प्रतिशह हो गई। जैसे-जैसे ही वैक्सीन की खेप जिले में पहुंचती गई थी, हर आयु वर्ग के लोग लगवाते रहे। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 44 के बीच 11 लाख 69 हजार 758 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य था, जिसमें 12 लाख से अधिक को डोज लगाई गई। दूसरी खुराक भी 11 लाख 19 हजार 299 को लग चुकी। प्रथम डोज 102.64 फीसदी, द्वितीय डोज 95.69 फीसदी लग चुकी है। 15 से 17 साल के मध्य 110689 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य था। प्रथम डोज 103885 और द्वितीय डोज 100642 को लग चुकी है। दोनों खुराक मिलाकर 204509 वैक्सीन की खुराक लगी। बूस्टर डोज 14.58 फीसदी के साथ 23457 को लग चुकी है। उसके बाद 12 से 14 साल के किशोरों को टीका लगाने का सिलसिला शुरू हुआ। 66 हजार 853 लक्ष्य के मुकाबले प्रथम खुराक 65 हजार 183 और दूसरी डोज 55 हजार 557 को लगी है।