साफ सफाई और रखरखाव के लिए वैक्यूम क्लीनर का उपयोग आम है लेकिन विशेषज्ञ इसे पर्याप्त नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि समुचित रखरखाव नहीं होने से कालीन का जीवन तो कम होता ही है, बीमारी फैलने का भी डर रहता है।
वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में होने वाले सप्ताहव्यापी सेमिनार में हिस्सा लेने इंग्लैंड से आए विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती कालीन खरीदने के साथ ही उसकी सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
जमीन पर बिछे कालीन में धूल और पैरों की गंदगी से ़बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इससे दमा और अस्थमा जैसे रोग हो सकते हैं।
ऊलसेफ आर्गनाईजेशन की प्रबंधक निदेशक डा.अगनेस सेडनाए ने कहा कि लोग महंगे कालीन तो खरीदते हैं लेकिन रखरखाव पर खर्च नहीं करते हैं।
बताया कि धूप दिखाने से कालीनों की चमक जा सकती है, रंग भी उड़ सकता है। ऐसे में रखरखाव की शुद्ध प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
कंपनी के रखरखाव विशेषज्ञ एडम जनक्वास्कि ने कहा कि लोग इसे हल्के में लेते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि लंबे समय तक कालीन की सफाई नहीं होने से बीमारी फैलने की आशंका रहती है।
आईआईसीटी निदेशक प्रो. केके गोस्वामी ने बताया कि रविवार को सुबह सेमिनार का उद्घाटन होगा, जिसमें कालीन निर्यातक और उत्पादक भाग लेंगे। कहा कि सात दिन का यह कार्यक्रम ज्ञानवर्धक होगा, जिसमें लोगों को सम्मिलित होना चाहिए। इस दौरान डा.किम गांधी भी मौजूद थे।