इस मौके पर निदेशक प्रो. केके गोस्वामी ने शिल्पकारों से कहा कि इस स्वर्णिम अवसर को भुनाकर आप न केवल दक्षता प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं।
निदेशक ने कहा कि डिजाइनिंग सतत प्रक्रिया है। इसमे कोई पूरी दक्षता हासिल नहीं कर सकता। इतना जरूर है कि आप अपने विवेक और वैश्विक बदलावों पर नियमित नजर रखकर निरंतर प्रगति कर सकते हैं।
कहा कि कागजी डिजाइनर बनकर न रहें, बल्कि यहां से प्रशिक्षण प्राप्तकर कंप्यूटर डिजाइनिंग में भी दक्षता हासिल करें। मुख्य परियोजना समन्वयक, प्रो.एसके पाल ने बताया कि डिजाइनर रशीद भट्ट 75 दिन यहां रह कर बारीकियां बताएंगे।
परियोजना समन्वयक, डा. आर कर्माकर ने कहा कि योजना के लिए कुल 40 प्रशिक्षुओं को चयनित किया गया है, जो तीन माह में 75 दिवस प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस दौरान चंद्रशेखर बाजपेयी, डा.बीडी गुप्ता, मोमिता बेरा आदि ने भी संबोधित किया।