जिले में मूसलाधार बारिश के चलते खेतों में जलभराव से किसानों को भारी नुकशान हुआ है। पानी में सब्जियों व पशु के लिए बोया चारा डूब गया है जिसके चलते किसानों के समक्ष पशु चारे का संकट खड़ा हो गया है। सुरियावां के अर्जुनपट्टी निवासी किसान भानुप्रकाश बिंद, अनूप कुमार, संदीप कुमार, रमाकांत याद आदि ने बताया कि लगभग पांच बीघे में बोई सब्जी नेनुआ, बैगन, तरोई, बोड़ा, मिर्च, सूरन की फसल पानी में डूब जाने से उकठ गई। दरवांसी के रविंद्र, हिंछलाल, सोहनलाल, शोभनाथ ने बताया कि पशुओं को हरे चारा के रुप में दो बीघे तक बोई गई ज्वार-बाजरा के गिर जाने से पशु चारा का संकट आ गया है। कारण है कि पानी न पहुंचने वाले खेतों में धान की रोपाई न कर पालतू पशुओं की व्यवस्था प्रति वर्ष की जाती रही है। चारों ओर पानी भरने के बाद हरा चारा ही एकमात्र सहारा बनता था वह भी बर्बाद हो गया। कुरमैचा, नवधन, ऊंज निवासी योगेश बिंद, पप्पू शर्मा, राकेश चौबे, मंगरुराम बिंद, पप्पू बिंद ने कहा कि जलनिकास रास्तों के जाम होने, अतिक्रमण के कारण निकासी होना संभव नहीं है जिससे कुरमैचा ताल में अभी तक 40 बीघे तक धान की रोपाई नहीं हो सकी है। रोपाई होने वाले खेतों में अधिक पानी लगने से फसल डूब गई है। जब तक जिला प्रशासन अभियान चलाकर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं कराएगा तब तक किसानों की समस्या दूर नहीं हो सकती।