तलहटी की खुदाई और डैम बनने से गर्मी में मोरवा नदी में भरा पानी।
साल के आठ माह तक जिस नदी में धूल उड़ती थी वह भीषण गर्मी में भी पानी से लबालब है। जी हां जिले के मध्य से गुजरी मोरवा नदी जल संरक्षण के लिए मिसाल बन गई है। साल भर पहले सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु की ओर से जो पहल की गई वह अब रंग लाती दिख रही है। पशु-पक्षी समेत आम लोगों को इसका फायदा मिल रहा है। सांसद अन्य नदियों की खुदाई कराने के साथ ही चकडैम बनाकर जल संरक्षण कराएंगे।
जल संरक्षण को लेकर केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार की ओर से तमाम प्रयास किया जा रहा है लेकिन धरातल पर स्थिति ठीक नहीं दिखती। गर्मी के दिनों में तालाबों के साथ ही मोरवा नदी भी सूख जाती है। साल में करीब आठ माह तक मोरवा नदी में धूल उड़ती थी। डीघ के पिलखुना स्थित ताल से मोरवा का उद्गम हुआ। जो पिलखुना से शुरू होकर करीब 40 गावों से गुजरते हुए चौरी के आगे वरूणा नदी में मिल जाती है। बारिश के दिनों में तलहटी कम होने से यह नदी जहां किसानों के लिए मुश्किलें पैदा करती है वहीं गर्मी और ठंड में सूख जाती है।
पिछले साल जल संरक्षण के मद्देनजर सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु से वार्ता करने के बाद मोरवा की तलहटी बढ़ाने और 10 से 15 डैम बनवाने की पहल की। डीएम प्रकाश बिंदु ने इसका स्वागत करते हुए मोरवा के उद्धार का आगाज किया। करीब दो से तीन माह की मेहनत के बाद मोरवा की स्थिति बदल गई। गत वर्ष की गर्मी में हुआ कार्य अब फलीभूत नजर आ रहा है। भीषण गर्मी के बाद भी मोरवा में हर तरफ पानी-पानी दिख रहा है। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि आगामी जिला योजना की बैठक में वरूणा नदी को भी जल संरक्षण के लिए गहरा कराने की पहल की जाएगी।