बीडा द्वारा कारपेट सिटी में लाखो की लागत से बनवाया गया ईटीपी जो खंडहर में तब्दील हो गया है
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ज्ञानपुर। भूगर्भ जल प्रदूषण रोकने के लिए सरकार भले गंभीर है लेकिन अधिकारी इसको लेकर संजीदा नहीं है। भदोही, खमरिया और घोसिया में भूगर्भ को दूषित कर रही कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। श्रम विभाग, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस देने तक ही सीमित है। आलम यह है कि भदोही नगर में हैंडपंपो का पानी पीने योग्य नहीं है। हैंडमेड और टफटेड कालीनों को बनाकर उसकी धुलाई, सफाई के समय प्रयोग होने वाले विभिन्न रसायन नाली के माध्यम से वरूणा और मोरवा नदी में बहाया जा रहा। कुछ कालीन कंपनी संचालक परिसर में ही हैवी बोरिंग कराकर पानी को उसी में गिरा देते हैं। जिससे भूगर्भ जल अंदर ही अंदर दूषित हो जाता है। मर्यादपट्टी, नई बाजार, बाजार सलाबत खां, स्टेशन रोड समेत अन्य मोहल्लों के हैंडपंप से निकलने वाला पानी पीने लायक नहीं है। कुछ मोहल्लों में सबमर्सिबल पंप तो कुछ स्थानों पर टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का माना है कि कालीन कंपनी के अंदर ही ईटीपी प्लांट स्थापित किया जाए। भदोही और नई बाजार में करीब 150 कालीन कंपनी में 30 से 40 कंपनी संचालक ही ईटीपी प्लांट का प्रयोग कर रहे। भूजल संरक्षण बोर्ड की रिपोर्ट की माने तो यहां पानी पीने लायक नहीं है। पानी में क्रोमियम, निकिल, कोबाल्ट, शीशा सहित तमाम घातक रासायनिक तत्व हैं। बताते चलें कि सर्वोच्च न्यायालय के सख्त निर्देश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो साल पूर्व बड़े पैमाने पर डाइंग प्लांटों के खिलाफ कार्रवाई की, कुछ प्लांटो पर ताले लगे लेकिन नतीजा सिफर रहा। पिछले दिनों योगी कैबिनेट की बैठक में भूगर्भ जल दूषित करने वालों के लिए कड़े कानून बनाए गए। जिसमें सात साल की सजा और 20 लाख जुर्माने का प्राविधान किया गया है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कालिका सिंह ने बताया कि कालीन कारखानों और डाइंग प्लांट की समय-समय पर जांच की जाती है। दो माह पूर्व गोपनीय तरीके से जांच की गई। इसमें डिफाल्टर 14 कंपनियो पर जुर्माना लगाया गया। ईटीपी प्लांट स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। अप्रैल में जांच कर कार्रवाई होगी।