आफत बनकर गिरी बारिश का ख़ौफ़ उसकी नजरों में अब भी नजर आ रहा था। अमर उजाला से बातचीत में सौरभ बारिश से हुई तबाही का जिक्र करते हुए भावुक हो गया।
बताया कि क्या गाड़ियां और क्या दूकान सब डूब चले थे। ऐसा लग रहा था कि अब शायद ही अपनों से मुलाक़ात हो पाए।
कोइरौना थानाक्षेत्र के सीतामढ़ी का रहने वाला सौरभ सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनीरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चेन्नई में डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड टेक्नोलॉजी का प्रथम वर्ष का छात्र है।
वह चेन्नई एयरपोर्ट के समीप गिन्नी इलाके में रहता है। रविवार को वह चेन्नई से अपने गांव लौटा। चेन्नई में आफत बनकर गिर रही बारिश का खौफ उसकी आंखों में साफ देखा जा सकता था।
अमर उजाला से बातचीत में उसने बताया कि दो दिसंबर को लगभग 12 बजे दिन में बारिश शुरू हुई। तीन दिसंबर की सुबह आठ बजे कैंपस में दो फीट पानी लग गया था, जो महज दो घंटे में पांच फीट तक पहुंच गया।
कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल के लगभग 150 छात्रों को सुरक्षा के लिए कॉलेज भवन के प्रथम तल पर पहुंचाया। लेकिन स्थिति बिगड़ती ही रही और चारों ओर पानी ही पानी हो गया। लोग मौत को करीब से देख रहे थे।
सौरभ ने बताया कि बिजली गुल हो गई थी और मोबाइल के नेटवर्क ने जवाब दे दिया था। हम सभी छात्र बहुत परेशान थे। समझ नहीं आ रहा था कि खुद को कैसे बचाया जाए।
हालांकि कॉलेज प्रशासन ने पूरी मदद की, लेकिन प्रलयंकारी बारिश की भयावह शक्ल ने डरा दिया था। चार दिसंबर को हम लोगों को घर जाने के लिए कहा गया।
कॉलेज से 19 किलोमीटर दूर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में पुलिस और स्थानीय लोगों ने मदद की। लगभग तीन किलोमीटर की दूरी गर्दन तक पानी में होकर तय करनी पड़ी।
बाद में बस से स्टेशन पहुंचा। न तो जेब में पैसे थे न ही खाने-पीने के सामान। चेन्नई से बंगलूरू पहुंचा और वहां से से कानपुर के लिए ट्रेन पकड़ी। पास में केवल 30 रुपये थे सो टिकट भी नहीं ले पाया।
रास्ते में टीसी ने बहुत परेशान किया। कानपुर से रात एक बजे इलाहाबाद की ट्रेन पकड़ी। टिकट न होने के कारण जेब में बचे 20 रुपये भी टीसी ने छीन लिए। भगवान की कृपा से ही जिंदगी बच सकी। सौरभ ने बताया कि अब भी चेन्नई में बड़ी संख्या में लोग बारिश के कहर से बेहाल हैं।