ज्ञानपुर। जनपद में बीते एक सप्ताह से तापमान लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही तापमान 43 डिग्री पहुंच गया है। 22 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गर्म हवाएं चल रही हैं। तपन ऐसी है कि धूप में बाहर निकलने वालों का माथा चकरा जा रहा है। लू को देखकर स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के 28 स्वास्थ्य केंद्रों पर 90 बेड आरक्षित कर दिया है। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय (एमसीएच) और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय (एमबीएस) भदोही में 10-10 बेड के लू वार्ड बनाए गए हैं। छह सीएचसी पर पांच-पांच बेड, 20 पीएचसी पर दो-दो बेड का लू वार्ड बनाया गया है। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक ने इन वार्डों में एसी, कूलर, पंखा ठीक करने के निर्देश केंद्र अधीक्षक को दिए हैं। बीते सात दिन में तापमान छह डिग्री तक बढ़ा है।
लू वार्ड में क्या-क्या है व्यवस्थाएं
- कूलर की व्यवस्था
- बड़े अस्पताल में एसी अनिवार्य
- पंखा जरूर होना चाहिए
- ग्लूकोज और ओआरएस घोल
- ठंडे पानी का पर्याप्त इंतजाम
- हर वार्ड में एक स्टॉफ, एक वार्ड बॉय
हर दिन पीएं पांच लीटर पानी
सौ शय्या अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुशील शुक्ला ने बताया कि शरीर में पानी की मात्रा की कमी होने से लू लगने की संभावना बढ़ जाती है। शरीर में पानी की कमी होने से लू की चपेट में आ सकते हैं। रोजाना करीब पांच से छह लीटर पानी पीना चाहिए। दोपहर 11 बजे के बाद कतई घर से बाहर न निकलें। तरल पदार्थों का खूब सेवन करें।
लू लगने के लक्षण
- तेजी से सिर दर्द होना
- निरंतर चक्कर, कमजोरी महसूस होना
- कमजोरी के साथ मांसपेशियों में ऐंठन होना
- उल्टी होना
इस तरह से करें बचाव
- ढीले, सूती कपड़े पहनें।
- खुद को ठंडा रखें।
- हल्का भोजन करें।
- हरी सब्जी का सेवन करें।
- दोपहर में घर से बाहर न निकलें।
कहां कितने बेड़ आरक्षित
- जिला अस्तपाल - 10
- एमबीएस भदोही - 10
- छह सीएचसी - पांच-पांच (कुल 30)
- 20 पीएचसी - दो-दो (कुल 40)
भीषण गर्मी में चल रहे लू को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है। जिला अस्पताल सहित 28 स्वास्थ्य केंद्रों पर 90 बेड आरक्षित किए गए हैं। कूलर, पंखा की व्यवस्था कर दी गई है। दवा भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। -
डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।
ईरान-इस्राइल युद्ध के प्रभाव से अप्रैल में अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा तापमान
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के अध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग में बदलाव के कारण मई की अपेक्षा अप्रैल में ही प्रचंड गर्मी पड़ रही है। सोमवार को अधिकतम तापमान 43 और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जीवाश्म ईंधन का जलना और वनों की कटाई होने के कारण तापमान में वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक तापमान पर विश्व में होने वाली हर एक घटनाओं का असर पड़ता है। प्रकृति इसे नियंत्रित करने का प्रयास करती है, लेकिन जब चीजें अत्यधिक हो जाएं और उसका नियंत्रिण न हो तो उसका असर वैश्विक रूप से देखने को मिलता है। ईरान-इस्रायल युद्ध में जिस तरह से गोला-बारूद दागे गए। इस कारण भी तापमान में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि देखने को मिल रही है। अगर इसी तरह रहा तो मई में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।