सुरियावां। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर रविवार को कैंप कार्यालय में संपन्न हुई जिला स्तरीय वर्चुअल बैठक में मृतक शिक्षकों आश्रितों को मिलने वाले हक-अधिकार पर आवाज उठाई गई।
जिलाध्यक्ष सुशील कुमार मिश्र ने कहा कि जिले के विभिन्न परिषदीय स्कूलों में तैनात होने वाले शिक्षकों की ड्यूटी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल में लगाई गई। इस दौरान उक्त शि ाक जान जोखिम में डालकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि नाममात्र की मौत होने का बयान जारी कर अपने असली चेहरे को बेनकाब करने में कोई कमी छोड़ी। जबकि संगठन मृतक शिक्षकों की सूची भी सरकार तक पहुंचा कर मिलने लाभ की मांग कर चुका है।
कहा कि लाभ देने की बात कौन कहे ओछी राजनीति शुरू की जा रही है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य, पुलिस आदि विभागों से चुनाव, महामारी में लगने वाले कर्मचारियों के सरकार की निगाह दूसरी है। अस्वस्थता का प्रमाणपत्र देने पर भी शिक्षकों को ड्यूटी करने के लिए विवश नहीं किया गया बल्कि एस्मा कार्रवाई का डर दिखाकर मौत के मुंह में झोंका गया जिसका अजाब सरकार और जिले में उन अधिकारियों को मिलकर रहेगा जो एसी कमरों और वाहनों में बैठकर अनदेखी की।
मृतक शिक्षकों कोरोना योद्धा घोषित कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, मृतक आश्रितों को योग्यतानुसार तैनात करने, महामारी और चुनाव के दौरान मरने वालों की तरह घोषणा का लाभ अविलंब दिलाने पर पहल न की गई तो संगठन ईंट से ईंट बजाने के लिए तैयार है। इस मौके पर जिला मंत्री शिवशंकर यादव, श्रीनाथ पांडेय, डा.अजय कुमार पांडेय, विलास चंद्र दुबे, मनोज पांडेय, मणिशंकर मिश्र आदि रहे।