छेछुआ गांव में कटान की भेंट चढ़ा शोभनाथ दलित का घर।
बाढ़ से उफनाई गंगा ने तटवर्ती इलाकों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। तीन सेमी. प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ते हुए गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार को 79.200 पहुंच गया। इसके साथ ही कटान तीव्र हो गई। चौड़ा होकर दूर तक फैल गए गंगा की लहरों ने दो दिन के अंदर छेछुआ और भुर्रा गांवों की 20 बीघे से अधिक कृषि भूमि को काटकर गंगा में मिला दिया है।
केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी स्थित मीटर गेज पर हुंकार भरते हुए रोज नई ऊंचाई छूट रही गंगा की लहरों ने कटान प्रभावित छेछुआ और भुर्रा गांवों में खलबली मचा दी है। 24 घंटे के अंदर लगभग एक मीटर तक बढ़कर गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार को शाम पांच बजे तक 79.200 मीटर पहुंच गया। तीन सेमी. प्रति घंटे की गति से बढ़ोतरी जारी थी। इसके साथ ही आक्रामक हुईं गंगा की लहरों ने बीती रात खेती की लगभग 20 बीघे जमीन को काटकर गंगा में मिला दिया। छेछुआ क ेप्रधान जगदीश सिंह के अलावा रामजी सिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह, रामधनी सिंह, अवधराज, कौशल, जिलेदार सिंह, अमर बहादुर, सूर्यप्रताप, अनिल कुमार, अनंत बहादुर, विनय बहादुर आदि ने कहा कि दो-तीन दिनों के दौरान छेछुआ की लगभग 15 बीघे जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। भूमिहीन किसान शोभनाथ दलित के कच्चे मकान का आधा हिस्सा बृहस्पतिवार को गंगा में समा गया। परिवारीजनों का कहना है कि दो दिनों में गंगा तकरीबन सात फीट तक उनके घर की तरफ बढ़ी।
जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार जगदीश पांडेय ने हालात का जायजा लिया। कहा कि पीड़ित परिवार को जमीन का पट्टा किया जाएगा। भुर्रा के ग्राम प्रधान गोरखनाथ कनौजिया ने बताया कि गांव की 25 बीघे से अधिक जमीन तीन दिनों में गंगा में समा गई। गांव के अवधराज सिंह, प्रेम बहादुर सिंह, राजाराम, विनय कुमार आदि ने कहा कि हर साल गांव की जमीन को गंगा की बाढ़ लील रही है, लेकिन इसके लिए अब तक कोई कारगर पहल नहीं की जा सकी है। उधर बाढ़ के दबाव से सीतामढ़ी के पक्के घाटों की सीढ़ियां तेजी से जलमग्न होने लगी हैं। उड़िया बाबा आश्रम तक पानी पहले ही पहुंच चुका था। सीतामढ़ी के अन्य तटवर्ती इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से पहुंचने लगा है।