गंगा के रौद्र रूप ने तटीय इलाकों में खलबली मचा रखी है। अब बाढ़ का पानी गांव की बस्तियों में तेजी से घुसने लगा है। जिससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही है। बाढ़ के पानी से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बस्ती में नाव से लोग पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि बाढ़ का जलस्तर नौ साल का रिकार्ड तोड़ने के करीब है। जिन घरों के आस पास बाढ़ का पानी पहुंच गया है, उन्हें आवागमन के साथ घरों में आने जाने में भी दिक्कत उठानी पड़ रही है। तमाम परिवार अपने घरों के सामान को दूसरे तल पर या अन्यत्र हटाने में लगे हैं। दो दिन से हो रही बारिश और गंगा बाढ़ के पानी ने लोगों को परेशान कर दिया है। जैसे जैसे गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है। वैसे वैसे किसानों की फसलें भी डूबती जा रही है। किसान अपनी बर्बादी पर बेबस हैं। धनतुलसी, कलिकमवैया, मवैया थान सिंह, बसगोती मवैया, इटहरा आदि गांवों के बस्तियों में बाढ़ का पानी पहुंच जाने से उनका संपर्क टूट गया है। गंगेश्वर नाथ धाम मंदिर बाढ़ के पानी से लगभग आठ फीट डूब गया है। मंदिर आने जाने के सभी रास्ते पानी से डूब गए हैं ।पर्यटन स्थल सीतामढ़ी में भी गंगा बाढ़ का पानी तेजी से पक्के घाट पर बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज कार्यालय के अनुसार गंगा का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे से बढ़ते हुए 80.820 मीटर तक पहुंच गया है। अगर जलस्तर बढ़ता रहा तो 2013 में 81.200 मीटर का रिकार्ड भी टूट सकता है। डीघ ब्लॉक के बेरासपुर, केदारपुर और बदरी गांव में कुछ लोगों के झोंपड़ी और घरों में पानी पहुंच गया है। बदरी गांव में राजकमल हरिजन, सोहित राम समेत कई लोगों के घर में पानी घुस गया। जिससे उन्हें अपने परिवार सहित अन्यत्र रहना पड रहा है। उनके घर में रखा सारा सामान पानी से भीगकर खराब हो गया। बेरासपुर में निषाद बस्ती और धइकार बस्ती के घरों के पास गंगा का पानी पहुंच गया है। जिससे पशुओं को बांधने और रहने में लोगों को काफी मुश्किल हो रही है। गंगा से सटे अधिकतर शवदाह गृह पानी में डूब गए हैं। इससे अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। सर्व समाज जनहित पार्टी ने तत्काल बचाव कार्य शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी के जिला अध्यक्ष सिंटू शुक्ल ने कहा कि 45 गांव के लोग बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। कई परिवार के लोगों के घरों में पानी घुस जाने से बेघर हो गए हैं। बाढ़ पीड़ित लोगों को राहत के नाम पर केवल अधिकारियों का दौड़ा ही चल रहा है।