लालानगर। औराई ब्लॉक के डेरवां गांव में मंगलवार की रात एक राष्ट्रीय पक्षी मोर की जान बचाने में ग्रामीण सफल हो गए। उसे कुछ कुत्ते नोच रहे थे। जानकारी पर पहुंची 112 नंबर पुलिस ने पक्षी को अपने संरक्षण में लिया। राजू पांडेय, श्रवण सिंह, शरद पांडेय, दीपक सिंह, छोटू आदि ने वन और पशुपालन विभाग पर सवाल उठाया कि एक दशक से जिले में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी प्रति माह लाखों रुपये वेतन उठा रहे हैं। पशु और हरित क्रांति के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जा रही है। संरक्षण न मिलने का परिणाम है कि जंगल से रिहायशी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे पशु-पक्षी विलुप्तता की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार लाखों रुपये पशु संरक्षण के नाम पर बहाया उसका भी कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आ सका। 30 फीसद छुट्टा पशु सड़क, खलिहान, तंग गलियों तक दस्तक देकर दम तोड़ने के लिए विवश हैं। गांववासियों ने डीएम आर्यका अखौरी से जिले में पशु-पक्षी विहार की स्थापना को समय की मांग की बताई।