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उत्पन्ना एकादशी : श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि के लिए रखा व्रत

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उत्पन्ना एकादेशी के मौके पर बड़े ​शिव मंदिर में पूजन अर्चन कराते आचार्य। स्रोत मंदिर
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ज्ञानपुर। कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को जिले में शनिवार को श्रद्धालुओं ने उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा। सुबह स्नान-ध्यान के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की स्तुति की गई। गोपीगंज स्थित बड़े शिव मंदिर पर श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। शाम को महिलाओं ने उपरोहितों के सानिध्य में विधि विधान से पूजन किया। आचार्य शरद पांडेय ने मंदिर पर पूजा कराया। बताया कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने मात्र से हजारों गोदान के फल की प्राप्ति होती है। महिलाएं व्रत भी रखती हैं। यह व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। पितृ भी संतुष्ट होते हैं। इससे घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है। बताया कि पौराणिक कथाओं है कि मूर नामक दैत्य अत्यंत शक्तिशाली था। इससे देवागण परेशान थे। वे शिवजी के पास गए। दैत्य के अत्याचार के बारे में बताया। भगवान शिव ने इंद्र और देवताओं के साथ भगवान विष्णु के पास गए। विष्णु ने दैत्य से युद्ध शुरू किया। इस दौरान वे बद्रीनाथ में हेमवती गुफा में योग निद्रा में चले गए। दैत्य खोजते हुए गुफा में जा पहुंचे। गुफा के अंदर भगवान योग निद्रा में थे, तभी उनके ऊपर दैत्य ने प्रहार करने की कोशिश की। विष्णु के शरीर के एक कन्या की उत्पत्ति हुई। कन्या मोर नामक राक्षस से युद्ध करके राक्षस को परास्त किया। तब योग निद्रा से भगवान उठे। दृश्य देकर कन्या से पूछे। राक्षस की मृत्यु कैसे हुई। कन्या ने सारा वृतांत सुनाया। भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। कन्या का नाम उत्पन्ना एकादशी रखा।
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