ज्ञानपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को यूनिफार्म, जूते-मोजे और बैग के लिए मिलने वाली डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) राशि में आधार कार्ड अब अड़चन नहीं बनेगा। शासन ने इसमें सहूलियत दी है। बच्चों के आधार कार्ड न होने पर भी डीबीटी की धनराशि उनके अभिभावकों के आधार कार्ड के माध्यम से भी सीधे खातों में भेजी दी जाएगी। इससे जिले के 15 हजार से अधिक बच्चों को लाभ मिलेगा। आधार कार्ड न होने से उन्हें अब तक डीबीटी की रकम नहीं मिल सकी है। जिले में 885 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें करीब एक लाख 40 हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन बच्चों को हर वर्ष नए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग आदि के लिए 1200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में भेजी जाती है। इस राशि में 600 रुपये यूनिफार्म, 175 रुपये स्कूल बैग, 125 रुपये जूते-मोजे के अलावा स्वेटर के लिए 200 और स्टेशनरी के लिए 100 रुपये शामिल हैं। अप्रैल में नया शिक्षा सत्र शुरू होने के करीब दो माह बाद शासन ने पहली बार डीबीटी किया। दो चरणों में अब तक करीब एक लाख 25 हजार बच्चों को लाभ मिल चुका है। पहले कई बच्चों के आधार न बनने से उन्हें डीबीटी का लाभ नहीं मिल पाता था। क्योंकि डीबीटी के लिए बच्चों के आधार का सत्यापन अनिवार्य था। लेकिन, अब इस अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। प्रभारी बीएसए विकास चौधरी ने बताया अब डीबीटी के लिए बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों का विवरण ही जरूरी है। बताया कि करीब एक लाख 25 हजार बच्चों को डीबीटी का लाभ मिल चुका है। शेष बच्चों को जल्द ही मिलने की उम्मीद है, जिससे व स्वेटर आदि खरीद सकेंगे।