कालीन लेबल को कालीन निर्यात संवर्धन परिषद ने दी मंजूरी।
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UP News: भारतीय कालीनों की ब्रांडिंग की दिशा में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय कालीनों की पहचान अब कालीन लेबल से होगी। सीईपीसी ने इसके डिजाइन को मंजूरी देकर छपाई करा रही है। बीते दिनों नई दिल्ली में परिषद बोर्ड की बैठक में इसे ट्रायल के तौर पर उपयोग करने की मंजूरी मिली है। छपाई के बाद इसका ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।
देश और विदेश में कालीनों को हाथ से छूते ही लोगों के मन में सवाल उठता रहा है कि भारतीय कालीन कैसे बनते हैं। इन्हें कौन लोग तैयार करते हैं। एक कालीन कितनी प्रक्रिया से गुजरता है। जहां कालीनों का निर्माण होता वहां का परिवेश कैसा होता है। इन्हीं सब सवालों का जवाब देने के लिए सीईपीसी कालीन लेबल लेकर आई है।
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की प्रामाणिकता, गुणवत्ता आश्वासन और ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि लेबल पर भारत सरकार की ओर से प्रोन्नत भी लिखा होगा, जो इसे और सशक्त बनाएगा।
सीईपीसी बोर्ड सदस्य मानते हैं कि इस लेबल के माध्यम से विदेश में आयातकों से लेकर खुदरा खरीदारों को भारतीय कालीनों के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़ा जा सकेगा। सीईपीसी सदस्यों का मानना है कि यह लेबल लगाना निर्यातकों के लिए अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन लोगों को लगाने के लिए प्रेरित जरूर किया जाएगा।