ज्ञानपुर। खंड शिक्षा अधिकारियों और फर्मों के तालमेल ने औराई और भदोही ब्लॉक में यूनिफॉर्म वितरण को पटरी से उतार दिया है। आलम यह है कि कई प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों का यूनिफॉर्म डंप है। समूहों से ड्रेस न लाने से शिक्षक भविष्य में कोई दिक्कत न हो, इसलिए वितरण से कतरा रहे, जबकि बीईओ उन पर लगातार दबाव बना रहे।
प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को हर साल शासन से दो-दो जोड़ी यूनिफॉर्म दिया जाता है। प्रति छात्र दो जोड़ी यूनिफॉर्म पर 600 रुपये खर्च आता है। जिले में पंजीकृत करीब एक लाख 40 हजार सामान्य, ओबीसी और एससी बच्चों के लिए करीब सात करोड़ की धनराशि जारी हुई है। प्रशासन की ओर से सुरियावां, अभोली को छोड़कर अन्य चार ब्लॉकों औराई, ज्ञानपुर, डीघ और भदोही में स्वयं सहायता समूहों को ड्रेस सिलाई की जिम्मेदारी दी गई है।
समूहों के सिले कपड़ों को ही स्कूलों में वितरित करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन एक जौनपुर जबकि एक स्थानीय फर्म खंड शिक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाकर बाजार से रेडीमेड ड्रेस खरीदकर वितरण कराने में जुटी है। कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि औराई और भदोही के कई स्कूलों में 10 दिनों से बोरियों में भरकर यूनिफॉर्म रखा गया है। भविष्य में प्रशासन की ओर से कोई जांच न हो, इसलिए वितरण नहीं कराया जा रहा। वितरण में गड़बड़ी का मामला गत दिनों जिला निगरानी एवं समन्वय समिति की बैठक में औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर भी उठा चुके हैं। मुख्य विकास अधिकारी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि समूहों से यूनिफॉर्म न लेने वाली फर्मों पर कार्रवाई की जाएगी। अगर खंड शिक्षा अधिकारियों की संलिप्तता मिली तो वे भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे।