भदोही। वैश्विक परिस्थितियों के बीच प्रभावित कालीन उद्योग में बुनकरों के सामने भी आजीविका का सबसे बड़ा संकट है। भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के कालीन परिक्षेत्र में करीब दो लाख लूम संचालित हैं, लेकिन अब तक इन लूम संचालकों को बिजली सब्सिडी या राहत की योजना का लाभ नहीं मिलता।
बुनकरों के साथ निर्यातक भी काफी समय से पावरलूम संचालित करने वालों की तरह हैंडलूम संचालकों को बिजली सब्सिडी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। कालीन परिक्षेत्र में 2 लाख लूम संचालित हैं, जिनमें हैंड नॉटेट, दरी लूम और हैंडलूम शामिल हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के वाइस चेयरमैन असलम महबूब के अनुसार हैंडलूम बुनकरों के सामने इस समय तमाम चुनौतियां हैं।
बताया कि पावरलूम बुनकरों को प्रति हॉर्स पावर 450 रुपये का एक निश्चित बिजली बिल देना होता है, लेकिन इसके उलट हैंडलूम संचालित करने वालों को कोई बिजली सब्सिडी नहीं मिलती। एकमा और सीईपीसी जैसी संस्थाएं कई सालों से इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेज रही हैं। हैंडलूम बुनकरों का व्यावसायिक कार्य अक्सर प्रभावित होता है, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ता है।