डायलिसिस यूनिट में मरीज देखते सीएमएस। स्रोत स्वयं
ज्ञानपुर। जिले के दो डिप्टी सीएमओ और दो सीएचसी अधीक्षक बीते एक महीने से ओपीडी में नहीं बैठ रहे हैं। प्रशासनिक कार्यों का हवाला देकर वे अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। डीघ और सुरियावां अधीक्षक ओपीडी में बैठने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं डिप्टी सीएमओ डॉ. आरके मौर्या और डॉ. आरपी यादव ओपीडी करने से कतराते हैं। दावा है कि उनके ऊपर प्रशासनिक कार्यों का दबाव होता है, जिससे वह ओपीडी में नहीं बैठ पाते। जिले के 29 स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित और संविदा को मिलाकर कुल 148 डॉक्टरों की तैनाती है। वहीं नौ उप मुख्य चिकित्साधिकारियों के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष केवल चार की ही तैनाती है। इसमें तीन प्लेन एमबीबीएस हैं और एक बेहोशी के चिकित्सक हैं। इसके अलावा छह अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों के मुकाबले दो की तैनाती है। हर किसी की प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। बताया जाता है कि कार्य का दबाव होने के कारण उन्हें मरीज देखने का समय नहीं मिलता है। शासन का निर्देश है कि प्रशासनिक कार्य के साथ निरीक्षण के दौरान ओपीडी भी कर सकते हैं। सीएमओ डॉ. एसके चक निरीक्षण के दौरान सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ वेलनेस सेंटर पर मरीज देखते हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी नियमित टीबी मरीज देखते हैं। एसीएमओ डॉ. ओपी शुक्ला जनरल मरीजों को देखते हैं लेकिन बीते नवंबर महीने में डीटीओ डॉ. विवेक श्रीवास्वत, डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष दूबे, डॉ. आरबी पाठक को छोड़कर किसी ने मरीज नहीं देखा था। इसके अलावा भदोही, औराई, भानीपुर, गोपीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक सीएचसी पर ओपीडी करते हैं। डीघ और सुरियावां अधीक्षक भी ओपीडी में नहीं बैठते। महाराजा चेत सिंह जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अजय तिवारी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। खाली समय होने पर दफ्तर में ही मरीज देखने लगते हैं। महराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय के सीएमएस आरआर मौर्या फिजीशियन हैं। ओपीडी में नियमित बैठते हैं। वहीं सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुनील कुमार पासवान रेडियोलॉजिस्ट हैं। वह ओपीडी से लेकर डायलिसिस केंद्र तक मरीज देखते हैं। औराई अधीक्षक कृष्णा चंद्र दूबे सर्जन हैं। ओपीडी के साथ ऑपरेशन भी करते हैं।