ज्ञान सरोवर पर वेदी की पूजा करतीं व्रती महिलाएं।
सूर्योपासना के चार दिवसीय अनुष्ठान डाला छठ के दूसरे दिन शनिवार को व्रती महिलाओं ने खीर (खरना) खाकर मंगल कामना की। व्रती महिलाएं रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। छठ पूजा को देखते हुए बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। लोग प्रमुख सरोवरों को साफ करते दिखे।
छठ पर्व के मद्देनजर बाजार में दूकानों पर फल खरीदने के लिए गांव देहात से भी लोग पहुंचे। पूजन अर्चन में लगने वाले सामानों की खरीदारी की गई। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और प्रतिदिन घंटों पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते थे। इस पर्व के बारे में एक कथा और भी है। इसके तहत जब पांडव सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। इसका फल भी उन्हें मिला और पांडवों को राजपाठ वापस मिल गया।