ज्ञानपुर। हाईवे पर पशु तस्करी का जाल तोड़ने में पुलिस नाकाम हो गई है। सख्ती के दावों के बीच हर रोज कई छोटे और बड़े वाहनों से मवेशियों की तस्करी हो रही है। सेफजोन बने नवधन से पूर्वी क्षेत्र में गोवंशी जबकि पश्चिम में भैंसे और पड़वा भेजे जाते हैं। हाईवे पर पड़ने वाले थानों में कई साल से जमे सिपाही तस्करों को पूरा लोकेशन देते हैं। सफेद और काला सोना कोड वर्ड से ट्रकों को आगे बढ़ाया जाता है।
जीटी रोड पर पशु तस्करी का कारोबार पर तमाम कोशिश के बाद भी अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले में सेफजोन बन चुके नवधन से सौ से 150 मवेशी प्रतिदिन बिहार और उन्नाव भेजे जाते है। गोवंशीय पूर्वी क्षेत्र बंगाल और बिहार जबकि महषिवंशीय पश्चिमी क्षेत्र में कानपुर, उन्नाव तक पहुंचते हैं। नवधन के एक तस्कर ने बताया कि सरायममरेज के मियांपुर, मिर्जापुर के कछवां और पिंडरा के तीन बड़े पशु तस्कर सप्ताह में तीन दिन आते हैं। पेंट से चिह्नित मवेशी छोटे और बड़े वाहन से सप्लाई करते। थानों और पुलिस के आला अधिकारियों की जिम्मेदारी भी उनकी होती है। बड़े स्तर पर वही देखते है। उसने स्वीकार किया कि थानों में दो से तीन साल से जमे सिपाही जो कारखास के करीबी होते हैं वे ही खर्च लेकर जाते हैं। पशु तस्करी में हाईवे पर आने वाले थानों से लेकर पुलिस अधिकारी तक लाल हो जा रहे हैं। जहां गोटी सेट नहीं हुई तो पुलिस दो-चार ट्रक पकड़कर अपनी उपलब्धि बताती है। एक बार गोटी सेट हो गई तो फिर उसे पूरी छूट दे दी जाती है। इलाहाबाद के एक तस्कर के खिलाफ तो सिपाही की हत्या के आरोप के साथ ही गैंगेस्टर की कार्रवाई भी की जा चुकी है। पुलिस के आला अधिकारी भले ही सख्ती का दावा कर रहे हैं लेकिन हकीकत जुदा है।
पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह ने कहा कि हाईवे पर सख्ती से तस्करी रुकी है। हाईवे की दोनों सीमाओं पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।