ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए खड़े लोग।
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गोपीगंज/सुरियावां। अगर आप मुंबई, दिल्ली और सूरत जाने की सोच रहे हैं तो मुश्किल होगी। आठ से 15 नवंबर तक ट्रेनों की सीट फुल होने से परदेशी लाचार हो गए हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद नौकरी पर लौटने को लेकर वे चिंतित हो उठे हैं। ढाई से तीन गुने कीमत पर भी टिकट नहीं मिल पा रहा है।
कोरोना के कारण 22 मार्च से 31 जून तक देश में लॉकडाउन रहा। इसके कारण मुंबई समेत अन्य शहरों से बड़ी संख्या में लोग निजी साधन, पैदल आदि से घर लौटे। एक जुलाई से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद धीरे-धीरे आर्थिक रूप से परेशान परदेशी नौकरी पर लौटने लगे हैं, लेकिन गिनी-चुनी ट्रेनों का ही संचालन होने से उनकी मंशा सफल नहीं हो पा रही है। भदोही रूट पर कामायनी जबकि ज्ञानपुर रोड रूट पर पवन एक्सप्रेस ही मुंबई के लिए जा रही है, जबकि दिल्ली के लिए लिच्छवी समेत तीन ट्रेने चल रहीं हैं। सभी ट्रेनों में आठ से 15 नवंबर तक सीटें फुल हैं। तत्काल में भी यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहा है। इससे उन्हें टिकट काउंटर पर घंटों खड़े रहने के बाद मायूस लौटना पड़ रहा है। ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर एक सितंबर से आरक्षण का कार्य शुरू है, लेकिन टिकट नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि वेटिंग टिकट लेकर कुछ लोग महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं। यात्रियों ने बताया कि साइबर कैफे और स्थानीय दलालों के कारण तत्काल टिकट वेटिंग हो जा रहा है। सुरियावां : महानगरों की यात्रा मुश्किल हो गई है। बिचौलियों और बाजार में टिकट बुक करने वालों को दो से तीन गुना अधिक कीमत देने पर भी टिकट नहीं मिल रहा है। मुंबई के लिए सामान्यत: एसी का टिकट 1500 तक मिलता है, लेकिन इन दिनों साढ़े चार हजार देने पर भी नहीं मिल रहा। यही हाल दिल्ली समेत अन्य महानगरों के टिकट पर भी देखने को मिल रहा है। स्टेशन अधीक्षक मनोज कुमार ने बताया कि कम संख्या में ट्रेनें चलने के कारण टिकट नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में काउंटर पर केवल यात्रियों का नाम उम्र और मोबाइल नंबर लिखा जाता था, लेकिन अब जहां जा रहे, गांव, मोहल्ला, पिनकोड, राज्य, पोस्ट ऑफिस समेत अन्य बातें लिखनी पड़ती हैं, तब तक समय निकल जाता है।