ज्ञानपुर। स्थानांतरण नीति को धता बताते हुए हुनरबाज बाबू वर्षों से अपनी जगह कायम है। उनका हुनर ऐसा है कि तबादला करने के बाद अधिकारी कुछ ही दिनों में अपने पास बुला लेते हैं। तहसील, ब्लॉक, विकास भवन, कलेक्ट्रेट, बेसिक शिक्षा विभाग में यह हाल है। डेढ़ साल पूर्व आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के मुताबिक 35 फीसदी क्लर्क एक ही जगह पर वर्षों से जमे हैं।
सरकारी दफ्तरों में एक स्थान पर कई साल से कार्यरत रहने वाले कर्मचारी भी प्रभावशाली लोगों से रिश्ते के चलते रसूख वाले हो जाते हैं। उनके लिए सरकार की स्थानांतरण नीति बेमानी हो जाती है। एक पटल से दूसरे पटल और एक तहसील से दूसरे तहसील में स्थानांतरण होने पर वे रहस्यमय तरीके से कुछ ही दिनों बाद अपनी पुरानी कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं।
दो माह पूर्व कलेक्ट्रेट के तीन बाबूओं का पटल बदल दिया गया था। किसी ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। सब पसंदीदा पटल पर लौट आए। कलेक्ट्रेट ही नहीं बेसिक शिक्षा, विकास भवन, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, जल निगम समेत अन्य सरकारी विभागों में कमोबेश यही स्थिति है। दबंग बाबुओं की मनमानी किसी एक विभाग में नहीं चलती है। हर जगह ऐसे कर्मचारी हैं। करीब डेढ़ साल पूर्व आरटीआई के तहत तत्कालीन जिलाधिकारी से सभी विभागों में तैनात कर्मियों के तैनाती की तिथि की जानकारी मांगी गई थी। 35 विभागों ने जो सूचना दी थी उसमें 35 फीसदी कर्मचारी स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते पाए गए। कुछ बाबू ऐसे मिले जो 1980 में नियुक्ति के बाद से एक ही पटल पर जमे थे।
स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करीब-करीब हर विभाग में हो रहा है। कलेक्ट्रेट के भूलेख, डीएम कार्यालय समेत कुल पांच, विकास भवन में तीन, बेसिक शिक्षा विभाग में एक, सीएचसी भदोही में एक, उद्यान विभाग में एक, पशुपालन में एक, मत्स्य में एक, नगर पंचायत कार्यालय ज्ञानपुर में दो, जिला अस्पताल में दो, एआरटीओ कार्यालय में चार, पालिका भदोही, गोपीगंज, घोसिया, खमरिया में एक-एक बाबू एवं कर्मचारी शामिल हैं।
जिले में स्थानांतरण नीति का पूरी तरह से पालन किया गया है। किसी भी पटल पर काेई भी लंबे समय से तैनात नहीं है। अगर कहीं कोई था भी तो उसे दूसरे पटल पर भेजने के बाद भी बाद में उसी पटल पर डाला गया है। इसमें कम से कम एक साल तक वे दूसरे पटल पर काम किए हैं। - गौरांग राठी। जिलाधिकारी।