डीघ के हरिरामपुर में बाढ़ के पानी से डूबकर नष्ट हुई फसल।
जलस्तर घटने से प्रभावित गांव से बाढ़ का पानी हटा तो बर्बादी की तस्वीर दिखने लगी है। खेतों में खड़ी फसल या तो कीचड़ में दबकर नष्ट हो चुकी है या सड़ गई है। तटीय 40 से अधिक गांव के हजारों बीघे फसल नष्ट हो चुकी है। ग्रामीण मार्गों और घाटों पर कीचड़ का ढेर लग गया है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार शाम छह बजे तक जलस्तर 78.160 पहुंच गया है।
करीब दस दिनों तक बाढ़ से जूझ रहे लोगों को बुधवार की देर रात से राहत मिलनी शुरू हुई। 81.030 मीटर तक पहुंच चुका जलस्तर शुरूआत में एक सेमी प्रति घंटे से कम हुआ लेकिन समय गुजरने के साथ तीन सेमी और अब पांच सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। जलस्तर तेजी से घटने पर तटीय गांव हरिरामपुर, बदरी, बेरासपुर, छेछुआ- भुर्रा, कलातुलसी, नारेपार समेत करीब 40 गांव के खेतों से भी पानी हट गया है। बाढ़ का पानी हटा तो किसानों की हाड़तोड़ मेहनत बर्बाद नजर आई।
उल्लेखनीय है कि खेतों में उर्द, मूंग, बाजरा समेत अन्य सीजन की फसल कीचड़ में दबकर नष्ट हो चुकी है। सीतामढ़ी, रामपुर गंगा घाट पर कीचड़ का ढेर लग गया है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक रविवार शाम छह बजे तक जलस्तर 78.160 मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर पांच सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है।