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संसार नश्वर, भगवान में लगाएं मन : आचार्य आनंद

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वीरभद्र पुर करियाव में भागवत कथा कहते आनंद पांडेय। संवाद
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मोढ़। क्षेत्र के वीरभद्रपुर करियाव में आयोजित भागवत कथा में रविवार को वाराणसी से आए आचार्य आनंद पांडेय ने मृत्यु के समय मनुष्य के कर्तव्य और भगवान के स्मरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने मृत्यु के समय के कर्तव्य पर प्रश्न किया था। शुकदेव जी ने बताया कि भगवान के नाम, रूप, गुण और लीला का श्रवण, कीर्तन और स्मरण ही मनुष्य का परम कर्तव्य है।
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आचार्य आनंद ने लोगों से संसार के भोगों, धन, परिवार और शरीर को नश्वर बताते हुए भगवान में मन लगाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि अभय चाहने वाले मनुष्य को हमेशा भगवान हरि का श्रवण, कीर्तन और स्मरण करना चाहिए। जब मन को साकार भगवान में स्थिर करना कठिन हो, तब शुकदेव जी विराट पुरुष की उपासना बताते हैं। उन्होंने कहा, जीवन का अंतिम लक्ष्य संसार का संग्रह नहीं, भगवान का स्मरण है। उन्होंने कहा कि जिसका चित्त भगवान के नाम, रूप, गुण और लीला में लग जाता है, उसके लिए मृत्यु भय का कारण नहीं, बल्कि भगवान की ओर जाने का द्वार बन जाती है। इस दौरान विशाल दुबे शास्त्री, जय प्रकाश मिश्रा, छाया मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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