सुरियावां रेलवे स्टेशन पर बदहाल इंटरलाकिंग। संवाद
रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण का काम बीते नौ माह से ठप है। कार्यदायी संस्था के काम छोड़कर चले जाने से प्लेटफार्म पर प्रस्तावित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी हैं। वहीं, करीब एक किलोमीटर लंबे प्लेटफार्म पर बिछाई गई इंटरलॉकिंग 40 से 50 जगहों पर धंस गई है। इससे यात्रियों को आवागमन में परेशानी हो रही है। सुरियावां जिले का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन अप और डाउन मिलाकर 22 से 25 पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होता है। यहां से रोजाना पांच से सात हजार यात्री यात्रा करते हैं। इसके बावजूद स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है।
करीब ढाई साल पहले विस्तारीकरण परियोजना के तहत स्टेशन पर काम शुरू हुआ था। करीब डेढ़ साल तक धीमी गति से काम चला, इसके बाद कार्यदायी संस्था काम बंद कर चली गई। तब से नौ माह से काम पूरी तरह ठप है। योजना के तहत प्लेटफार्म, बाउंड्रीवाल, पेयजल सुविधा और यात्रियों के बैठने के लिए बेंच आदि विकसित किए जाने थे। अब तक करीब एक किलोमीटर प्लेटफार्म पर इंटरलॉकिंग का ही काम हो सका है। इसकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। इंटरलॉकिंग कई स्थानों पर धंसने से यात्रियों को दिक्कत हो रही है। स्टेशन की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां स्टेशन का बोर्ड तक नहीं लगा है। स्टेशन अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से काम रुका हुआ है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। आगे का निर्णय वहीं से लिया जाना है।
सुरियावां रेलवे स्टेशन पर बदहाल इंटरलाकिंग। संवाद