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गंगा का जलस्तर स्थिर, पनी से घिरी हैं कई बस्ती

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बाढ़ के पानी से घिरा मौनी बाबा आश्रम। संवाद - फोटो : BHADOHI
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सीतामढ़ी। करीब पांच दिनों तक तेजी से बढ़ा गंगा का जलस्तर रविवार की रात से स्थिर हो चुका है, हालांकि जिन बस्तियों में पानी भरा है वहां समस्याएं बरकरार हैं। सोमवार शाम छह बजे तक जलस्तर 80.500 मीटर पर रूका है। सीतामढ़ी के छेछुआ, मवैयाथान सिंह, गोपीगंज के रामपुर घाट के समीप बस्तियों में बाढ़ के पानी से लोग परेशान हैं। पहाड़ी राज्यों में बारिश और हथिनी कुंड से पानी छोड़ने से जिले में गंगा का जलस्तर पांच दिन लगातार बढ़ा। जिससे इटहरा की डफाली बस्ती, कला तुलसी की दलित बस्ती, हरीरामपुर के माझी बस्ती, कलिक मवैया की विश्वकर्मा बस्ती में दो से तीन फीट तक पानी भर गया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित लोगों को राहत शिविर में पहुंचाया। जहां अधिकारियों की निगरानी में सभी को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है, लेकिन राहत शिविर में मौजूद लोगों के पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया है। जिससे उन्हें गायब होने का डर सता रहा है। इटहरा में गंगेश्वर नाथ धाम और डमरु बाबा आश्रम पानी से घिर गया है। करीब सात फीट पानी से घिरे डमरू बाबा को मदद की दरकार है। बाढ़ के पानी से छेछुआ, भुर्रा, इटहरा, मवैयाथान सिंह आदि गंगा कटान प्रभावित गांवों में किसानों की कृषि योग्य बहुमूल्य जमीनें कटान की भेंट चढ़ती जा रही हैं। अब तक दो बीघे से अधिक जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। सिंचाई विभाग के अभियंता पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार की रात से जलस्तर स्थिर है। सोमवार को शाम तक 80.500 मीटर पर पानी ठहरा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब धीरे-धीरे पानी घटाव की ओर जाएगा। बाढ़ के मद्देनजर कोनिया क्षेत्र में दो कॉलेजों में बाढ़ राहत शिविर बनाया गया है। इसमें श्री शिवकरन मिश्र इंटर कालेज इटहरा और श्री नारायण इंटर कॉलेज धनतुलसी। दोनों जगह करीब 200 लोग विस्थापित हैं। राहत शिविरों में रहने वालों को प्रशासन की ओर से नाश्ता, भोजन, दवाएं दी जा रही हैं। बच्चों को दूध पहुंचाया जा रहा है। छेछुआ की प्रेमा देवी, मीना देवी ने बताया कि रहने और भोजन की व्यवस्था अच्छी है। बच्चों को दोनों समय दूध मिल रहा है। कहा कि घर की याद सता रही है। बाढ़ राहत शिविर में कानूनगों अमजद हुसैन, कौशलेश श्रीवास्तव, संजय सिंह चौहान, दिनकर दूबे, राजपति सरोज, राकेश शुक्ल, मनोज पांडेय आदि देखरेख में लगे रहे।
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