ज्ञानपुर। देवोत्थान एकादशी से शुरू हुई शहनाई की गूंज पर अब विराम लग गया है। 11 दिसंबर को शुक्र अस्त होंगे और 16 दिसंबर को सूर्य शुक्र से धनु राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ खरमास की शुरुआत हो जाएगी। मांगलिक कार्य पूर्ण रूप से बंद हो जाएंगे। एक माह तक शहनाई की गूंज नहीं गूंजेगी। 15 जनवरी बृहस्पतिवार सुबह 6.05 बजे खरमास समाप्त होगा। भिदिउरा गांव निवासी आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि हिंदू परंपरा के अनुसार खरमास माह में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नींव पूजन सहित विभिन्न कार्य खरमास में वर्जित होते हैं। बृहस्पति और शुक्र के अस्त होने पर मांगलिक कार्य एकदम बंद हो जाते हैं। बताया कि एक नवंबर को देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हुई थी। चार दिसंबर तक विवाह के अच्छे मुहूर्त थे। अब मुहूर्त नहीं हैं। 16 दिसंबर मंगलवार को 1.24 बजे से खरमास शुरू हो रहा है। आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि जब सूर्य धुन राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास शुरू होता है। नए साल में 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास सप्ताह हो जाएगा लेकिन जनवरी में शुक्र उदय नहीं हो रहे हैं। इसके कारण विवाह का मुहूर्त फरवरी के पहले सप्ताह में है। बृहस्पति, शुक्र उदय होने के बाद ही विवाह के मुहूर्त बनते हैं।