प्रदेश सरकार की लोहिया आवास योजना में भ्रष्टाचार की सेंध लग गई है। छत ढलने से पहले ही गरीबों की उम्मीद दरकने लगी है। ज्यादातर गावों में निर्माण के मानक को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आवास के लिए बनाए गए पिलर में अभी से ही दरारें आने लगी हैं। डीएम से लेकर सीडीओ कार्यालय तक शिकायतों की लंबी फेहरिस्त पहुंचने लगी है।
प्रदेश सरकार महत्वाकांक्षी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया ग्रामसभा के माध्यम से गावों का विकास कर रही है। लोहिया गांव में रहने वाले गरीबों को पक्का घर देने के लिए सरकार लोहिया आवास बनवा रही है। साढ़े तीन लाख की लागत से बनने वाले आवास में सोलर लाइट भी लग रहा है। वर्ष 2015-16 में 633 आवास बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। करीब एक साल बाद 50 फीसदी ही आवास पूर्ण हो सके हैं। मुसहर, दलित, पासी,सोनकर सहित गरीब बस्तियों में बनने वाले आवास के मानक में व्यापक स्तर पर धांधली की आवाज उठने लगी है। आवास निर्माण में दोयम दर्जे के सरिया, गिट्टी, बालू, ईंट का प्रयोग किया जा रहा है। डीघ के कलापुर की मुसहर बस्ती में 19 आवास बनाया जा रहा है। आवास निर्माण के शुरूआत में ही मानक की पोल खुलने लगी है। आवास के लिए बनाए गए पिलर में अभी से ही दरारें आने लगी हैं। भविष्य में कोई घटना न घटे इसके लिए कई ग्रामीणों ने सीडीओ और डीएम के यहां प्रार्थना पत्र देकर जांच कराने की मांग की। कलापुर ही नहीं कमोबेश यही हालत जिले के ज्यादातर गांव में है। सुरियावां के जमुनीपुर अठगवां, डीघ के कूड़ी खुर्द, औराई विकास खंड के औराई, महथुआं, कुरौना में भी आवास निर्माण को लेकर ग्रामीण अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
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हर कदम पर लगता है सुविधा शुल्क
ज्ञानपुर। डीघ विकास खंड के कलापुर गांव निवासी शेषधर बिंद ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर लोहिया आवास निर्माण की जांच कराने की मांग की। कहा कि लोहिया आवास मिलने से लेकर पूर्ण होने तक हर कदम पर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है, लाभार्थी न सुने तो उसका आवास भी पूरा होना मुश्किल हो जाता है।
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लोहिया आवास के निर्माण की समय-समय पर निगरानी कराई जा रही है। विभागीय इंजीनियर आवासों का अवलोकन करने के लिए जाते हैं। जिन-जिन गावों की शिकायत मिल रही है वहां खुद जाकर जांच कर रहे हैं।
संत कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए भदोही