स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को देश के विभाजन पर स्मृति दिवस पर काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित हुए। इसमें प्रदर्शनी, चित्रकला, मौन जुलूस के माध्यम से उस समय की स्थितियों पर प्रकाश डाला गया।
सूचना एवं जन संपर्क विभाग की ओर से केएनपीजी कॉलेज में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी का ज्ञानपुर विधायक विपुल दूबे ने शुभारंभ किया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाईयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है। इसके पूर्व केएनपीजी कॉलेज से मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस दुर्गागंज तिराहे पर आने के बाद कॉलेज पहुंचकर समाप्त हुआ। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे, मनोज मिश्रा, सीडीओ भानु प्रताप सिंह आदि रहे। इसी तरह केएनपीजी कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पं. श्यामजी, राकेश यादव, महेंद्र यादव, बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह, पंकज कुमार आदि रहे। अनुश्री पीजी कॉलेज सुरियावां में क्या भारत विभाजन अनिवार्य था पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि आरएसएस के जिला कार्यवाहक विष्णुजी ने कहा कि हमें स्वतंत्रता प्राप्ति का मूल्य किस हद तक चुकाना पड़ा है विभाजन उसका एक उदाहरण है। स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र का जन्म विभाजन के हिंसक दर्द के साथ हुआ। यह विभाजन मानव इतिहास में सबसे बड़े विस्थापनों में से एक है। इस मौके पर रविचंद यादव, धर्मेंद्र कुमार उपाध्याय, अमित कुमार सिंह, विजय कुमार श्रीवास्तव, रामफल बिंद, बीना सिंह, दिलीप कुमार विश्वकर्मा आदि रहे। गोपीगंज नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी अमिता सिंह के नेतृत्व में मौन जुलूस निकालकर विभीषिका में प्राणों की आहुति देने वाले अनाम लोगों को नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। इस मौके पर विष्णु प्रसाद, मंगला पांडेय, पीर मोहम्मद, असगर अली, अचल श्रीवास्तव, विवेक कुमार मोदनवाल, मुन्ना शर्मा आदि रहे।