धरना-प्रदर्शन में आप ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश में समान शिक्षा व्यवस्था कायम करने में मदद मिलेगी।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा गुणवत्ता ताख पर रखकर निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं से मनमाने पैसे वसूले जाते हैं। अलबत्ता इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हाईकोर्ट गए शिक्षक के खिलाफ सरकार दंडात्मक कार्रवाई करती है, जो पूरी तरह निंदनीय है।
कहा कि सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के लिए ब्यूरोक्रेसी, सरकार भी जिम्मेदार है।
क्योंकि शिक्षकों से तमाम कार्य कराकर पढ़ाने के लिए समय नहीं देती सरकार। इससे शिक्षा की गुणवत्ता घटी और बाजारीकरण तेजी से बढ़ा है।
दोहरी शिक्षा प्रणाली से संविधान में उल्लिखित समानता का अधिकार पालन नहीं हो रहा है। इससे शिक्षा का अधिकार कानून 2009 सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। धरना प्रदर्शन में मनोज गुप्ता, मोहम्मद वसीम, अरुण चौहान, केडी मिश्रा, जयप्रकाश, इम्तियाज रजा, कफील अहमद, वंशराज, योगेश भारती, श्यामसुंदर मौय, अनिल सिंह, अकील अहमद, शाहिद अहमद आदि रहे।