ज्ञानपुर। चौरी के बरवां सहकारी समिति पर धान खरीद में एक करोड़ 23 लाख के गबन का राज खुलते ही प्रशासनिक अफसरों के कान खड़े हो गए हैं। यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले में धान खरीद के दौरान एक मिलर की हत्या भी हत्या हो चुकी है। तीन केंद्र प्रभारी भी जांच के दायरे में आ चुके हैं। रबी और खरीफ सीजन में सरकार किसानों से धान और गेहूं की खरीद करती है। सरकार की मंशा रहती है कि किसानों की उपज खरीदकर उन्हें समय से भुगतान किया जाए, लेकिन केंद्र प्रभारियों की मनमानी से अन्नदाताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। सवा करोड़ के गोलमाल में फंसे चौरी के बरवां के प्रभारी संतोष कुमार शुक्ल जेल भेज दिए गए। विभागीय सूत्रों की मानें तो होली के अवकाश में बरवां केंद्र पर तैनात केंद्र प्रभारी संतोष कुमार शुक्ला ने सरकारी धान अधिकृत मिलर के यहां भेजने के बजाए व्यापारी को बेच दिया था। धान घोटाले के बाद साधन सहकारी समिति और पीसीएफ के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नींद उड़ गई है। जानकारों का कहना है कि पीसीएफ के खरीद केंद्रों पर व्यापक स्तर पर धांधली की गई है। किसानों से खरीद करने के बजाए बड़े पैमाने पर व्यापारियों से धान खरीदा गया है। जांच कराई गई तो बड़े घोटाले से इनकार नहीं किया जा सकता है। दो साल पूर्व महराजगंज के एक मिलर की धान खरीद में लेनदेन को लेकर मिर्जापुर में हत्या हुई थी। पुलिसिया जांच में खुलासा होने पर विभागीय अफसरों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी। विपणन विभाग के एक कर्मचारी की माने तो धान खरीद के समय दूसरे प्रांतों से सस्ती दर पर धान मंगाकर उसे व्यापारियों को बेचा जाता है। अगर सभी केंद्रों की जांच हुई तो बड़ेे स्तर पर धांधली का खुलासा हो सकता है।