पसीने से लथपथ लोग बेहाल दिखे। तालाबों में पानी न होने से मवेशियों के लिए पेयजल संकट गहरा गया है।
अप्रैल महीने के दूसरे पखवारे से पड़ रही गर्मी मई महीने के पहले सप्ताह से ही जानलेवा हो चुकी है।
जैसे-जैसे दिन गुजर रहा है गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है। मई के पहले पखवारे में पारा जहां 40 से कम रहा वहीं दूसरे पखवारे में 40 और 45 के मध्य पहुंच चुका है। सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक गर्म हवाओं की चुभन लोगों को महसूस हो रही है।
सुबह 10 बजे से दिन में तीन बजे तक तो लोग लू से बचने के लिए घरों से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। आसमान से धधकती सूर्य की दहकती लपटों संग गर्म हवाएं लोगों को बेहाल कर दे रही हैं।
पंखे और कूलर भी लू के संवाहक बन चुके हैं। मांगलिक सीजन होने से लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं तो शरीर को पूरी तरह ढंक कर चल रहे हैं। गर्मी के चलते ग्रामीण इलाकों के तालाब सूख चुके हैं। उसमें पानी न भरने से मवेशियों को काफी परेशानी सहनी पड़ रही है।