उन्होंने भक्तों को आशीवर्चन देते हुए प्रभु ध्यान में मन लगाने को कहा। स्वामी जी ने कहा कि 84 लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद मानव तन मिलता है।
मानव तन मिलने के बाद मनुष्य प्रभु का भजन छोड़कर भोग विलास में लिप्त हो जाता है। कहा कि मानव जीवन स्वतंत्र है, यह जीवन हरि के भजन में लगाने से परम सुख मिलेगा। भक्तों ने स्वामी जी की आरती उतारी। भजन कीर्तन में श्रद्धालुओं ने जमकर गोता लगाया।
इस मौके पर फूलचंद्र यादव, वंशीधर शुक्ला, पंचलाल, डा. आरएन यादव, रमेश चंद्र यादव, कृष्णा, नंदूूलाल, सुजीत यादव, सूर्यबली यादव, चंद्रबली यादव सहित कई लोग मौजूद रहे। आयोजक डा. जगरनाथ यादव ने आए हुए लोगों के प्रति आभार जताया।