ज्ञानपुर। दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में जद्दोजहद कर रहे वनवासी गरीब परिवारों को दिन भर की मेहनत के बाद खुले में रात गुजारनी पड़ रही है। कहीं जिम्मेदारों की उदासीनता तो कहीं अफसरों की अनदेखी से आशियाने का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि कहीं छत नहीं पड़ सही है, तो कहीं प्लास्टर नहीं हो सका है। कहीं जमीन बनने तो कहीं खिड़की दरवाजे लगने का इंतजार है।
गरीब परिवारों को आशियाना देने के लिए एक ओर जहां प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित हो रही है तो वहीं विशेषकर वनवासी परिवारों को लाभान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना का संचालन किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में चार हजार से अधिक लाभार्थियों को आवास आवंटित कर छत मुहैया करा दिए जाने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन वास्तविक धरातल पर स्थिति बिलकुल ही विपरीत है। कहीं छत नहीं पड़ी है तो कहीं प्लास्टर व फर्श बनने का इंतजार है। सचिव और प्रधानों की मनमानी से ज्यादातर आवास आधे-अधूरे पड़े हैं। अधिसंख्य गांवों में वनवासी आवास का राशि हजम करने की शिकायत भी की गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। नरोत्तमपुर के लालमनि वनवासी ने कहा कि तीन साल पूर्व आवास मिला तो लगा अब पक्के घर में जाएंगे, लेकिन निर्माण पूर्ण न होने पर परिवार संग कभी पेड़ के नीचे तो कभी रेलवे प्लेटफार्म पर रात गुजारनी पड़ती है। इससे दिक्कत हो रही है। आशा वनवासी ने भी प्रशासन से गुहार लगाई। कहा कि आवास न बनने से काफी परेशानी हो रही है।
इनसेट
केस 1 : भदोही ब्लाॅक क्षेत्र के नरोत्तमपुर गांव (मोढ़ बाजार) में वनवासी परिवारों का आवासों का निर्माण कार्य दीवार खड़ी कर छोड़ दिया गया है। छत नहीं पड़ पा रही है। कारण बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल पर जलजमाव के चलते काम नहीं हो पा रहा है, जबकि स्थिति यह है कि लाभार्थी परिवारों को कभी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तो कभी किसी अन्य स्थान पर खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है।
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केस 2 : भदोही के पिपरिस गांव में वनवासी परिवारों को आवास आवंटित किया गया। वाराणसी के मूल निवासियों का आवास आधा अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया। उसका पैसा कहां गया यह पत नहीं चला। प्रकरण में शासन के निर्देश पर जांच चल रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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भूमाफियाओं के सांठगांठ से रूका, कार्रवाई की मांग
ज्ञानपुर। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के मोढ़ बाजार अध्यक्ष भोलानाथ गुप्ता ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री आवास निर्माण की जांच कराने की मांग की। आरोप लगाया कि कुछ भूमाफियाओं के सांठगांठ से निर्माण अधूरा पड़ा है। जहां वनवासी के आवास स्वीकृत हुए वहां की जमीन काफी कीमती है। जिससे उनका आवास तीन साल से लटका है। कहा कि जिले में सीएम आवास की जांच कराई जाए तो व्यापक स्तर पर धांधली सामने आएगी।
वर्जन
अब तक 950 मुख्यमंत्री आवास में 600 पूर्ण हो चुके हैं। अधूरे आवास के निर्माण के लिए बीडीओ को निर्देश दिया गया है। कुछ स्थानों पर जमीन और कुछ में विवाद के कारण रूका है। पिपरिस मामले की जांच शासन के निर्देश पर हो रही है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -आदित्य कुमार, परियोजना निदेशक।