धान खरीद के लिए शासन स्तर से नियम तय कर दिया गया है। इस बार ऐसी व्यवस्था की गई है कि कोई भी किसान फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही इस बार आधार लिंक्ड खाते में ही धान बिक्री का पैसा भेजा जाएगा। कई बार किसान ऐसा भी करते हैं कि जिस खाते पर केसीसी होती है वह खाता संख्या न देकर दूसरा दे देते हैं। धान का पैसा भी आ जाता है और वे केसीसी का बकाया भी जमा नहीं करते।धान खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से इस तरह की पहल की गई है। खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार, बीते दिनों खरीद से संबंधित कैलेंडर जारी किया गया है। उसमें कहा गया है कि किसानों को धान अगर बेचना है तो उन्हें अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। किसी भी सहज जनसेवा केंद्र से पंजीकरण कराया जा सकता है। इसके लिए खतौनी, आधार नंबर, मोबाइल नंबर सहित अन्य अभिलेखों की जरूरत पड़ेगी। खास बात यह है कि इस बार उसी खाते में धान बिक्री का पैसा आएगा जो आधार नंबर से लिंक होगा। इससे किसानों को कई मामले में लाभ भी मिलेगा। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन की इस व्यवस्था का किसानों केे लाभ मिलेगा। कई बार ऐसा होता है कि किसान धान तो बेच देते हैं लेकिन खाता संख्या अलग से देने पर कुछ अंक गलत होने से धनराशि नहीं जाती। इतना ही नहीं कई बार यह भी शिकायत आती है कि पंजीकरण किसी ओर का था और धान बेचने के बाद पैसा पहुंचा किसी और के खाते में। अब यह समस्या दूर हो जाएगी।