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मकर संक्रांति:चूड़ा कुटाई मशीनें गुलजार,लग रही भीड़

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ज्ञानपुर। मकर संक्रांति यानी खिचड़ी का त्योहार आने वाला है। इसको लेकर तैयारियों को तेज कर दिया गया है। चूड़ा कुटाई की मशीनें गुलजार हो गईं हैं तो गांवों में गुड़ और तिलकुट की सोंधी खुशबू अन्नदान के त्योहार की रंगत बिखेरने लगी है। बाजार में गुड़, तिलकुट और पट्टी आदि की दुकानें सज गईं हैं।
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आगामी 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति का पर्व खिचड़ी को देख चूड़ा मशीनें गुलजार दिखने लगी हैं। जहां पहुंचकर ग्रामीण धान से चूड़ा बनवाने के लिए सुबह से शाम तक जुटे दिख रहे हैं। जबकि लाई-चूड़ा, बेसन लेड़ुआ, बादाम पट्टी, चना पट्टी, गट्टा आदि जैसे खाद्य पदार्थों से दुकानें सज चुकी हैं, लेकिन अभी 10 दिन समय होने के कारण खरीदारी जोर नहीं पकड़ पा रही है। चूड़ा कुटाई मशीन संचालक इसको जमकर कैश करा रहे हैं। प्रति किलो पांच रुपये की दर से चूड़ा कुटाई की जा रही है। ज्ञानपुर नगर के भिदिउरा, भुड़की, तेजीपुर, असनाव, जोरई, हॉस्टल चौराहा, बालीपुर, पाली तिराहा, पुरानी बाजार ज्ञानपुर, कलियापुर, बैराखास, सिंहपुर, छोटाडीह, गोपीगंज नगर, जंगीगंज बाजार, सूफीनगर, दरवांसी, गोधना, ऊंज, नवधन, रामकिशुनपुर-बसहीं, रजमला, चंदापुर, सुभाषनगर बाजार क्षेत्रों से सटे गांवों में लाई-चूड़ा बनाने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं बाजारों में दुकानदार भी मकर संक्रांति पर्व पर अधिक से अधिक मुनाफा कमाने की चाहत में दुकानें सजा लिए हैं। दुकानदार राजकुमार, गौरव, सुरेंद्र ने बताया कि पूर्व की अपेक्षा जितनी खरीदारी पर्व के शुरुआती दौर में होती थी, अब उतनी नहीं हो पा रही है। ठंड और कोहरे के कारण ग्राहकों की आमद बाजारों में कम देखी जा रही है। उधर चूड़ा कुटाई में लगे बड़कू भूज, बाबा भूज, रमेशचंद्र, राजू, भुवनेश्वर आदि ने बताया कि मौसम की बेरुखी से भट्ठी को खुराक दे पाना कठिन हो गया है। ईंधन को एकत्रित करने में कठिनाई हो रही है, जिसके कारण चूड़ा कुटाई का दाम इस वर्ष कुछ अधिक रखा गया है। ज्ञानपुर बाजार में दुकान सजाकर बैठे दुकानदार रवि गुप्ता, रोहित गुप्ता, सोनू गुप्ता
गांव-मोहल्लों में गूंज रहा भक्काटे का शोर
ज्ञानपुर। जनवरी माह का शुभारंभ होते ही ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में भक्काटे का शोरगुल शुरू हो चुकी है। पतंग की खरीदारी के लिए बच्चे पूरे दिन दुकानों की ओर भागदौड़ करने में कमी नहीं रख रहे हैं। बड़ी पतंगों की कीमत 10 से लेकर 50 रुपये तक होने से तमाम बच्चे एक-दो रुपये वाली पतंग से काम चला रहे हैं। इस बीच कई दुकानों पर चाइनीज मांझे भी बिक रहे हैं।
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