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अंग्रेज पिट्ठुओं ने करा दी थी छोटे भाई की हत्या

Sun, 14 Aug 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
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 आजादी के मतवालों की बात चलेगी तो भदोही के दो भाई बेचन राम गुप्त और गोवर्धन दास गुप्त की वीरता को हमेशा याद किया जाएगा। अंग्रेजों के खिलाफ जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने वर्ष 1942 में जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया था तो दोनों भाईयों ने उसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। दोनों भाई न केवल खुद असहयोग आंदोलन में सक्रिय थे, बल्कि शहर के लोगों को भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार करते थे। अपने खिलाफ माहौल बनता देख अंग्रेजों ने चिढ़कर गोवर्धन दास गुप्त की हत्या करा दी। भाई की हत्या भी बेचन राम को आजादी के आंदोलन से डिगा नहीं सकी। उन्होंने घरवालों को सांत्वना दी और फिर अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय हो गए।
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1939 में शुरू हुए द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार ने जब भारतीय फौजों का इस्तेमाल शुरू किया तभी महात्मा गांधी ने भारतीय वीर जवानों और आजादी के मतवालों के साथ मुंबई में बैठक कर भारतीय फौजों की वापसी का दबाव अंग्रेजों पर बनाया। उसी बैठक में यह तय किया गया कि यदि भारतीय फौज को वापस नहीं बुलाया जाता है तो अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा दिया जाए।  8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में गांधी जी ने देश भर से वीर जवानों और आजादी के मतवालों को जुटा कर अपने जोशीले भाषण में लोगों से कहा कि यदि जेल भी जाना पड़े तो हम लोग जाएंगे लेकिन अब इन अंग्रेजों को भगा कर ही दम लेना है। वहां से लौट कर बेचन राम ने समर्थकों संग भदोही में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो का बिगुल फूंक दिया। यहां सभा के दौरान ही उनके भाषण को बगावत बताते हुए अंग्रेजों ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इसके बाद तो जब वह जेल से छूटते, लोगों को इकट्ठा करके अंग्रेजों की गुलामी से आजादी के लिए असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने को कहते। उस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। वर्ष 1944 में जब बेचन राम जेल में थे, उसके कुछ समय बाद 1945 में उनके छोटे भाई गोवर्धन दास गुप्त की कुछ अंग्रेज पिट्ठुओं ने मिल कर हत्या करा दी। इससे भी बेचन राम विचलित नहीं हुए और घरवालों को सांत्वना देकर वे आजादी के आंदोलन में लगे रहे। वाराणसी और आसपास के जिले में आजादी की लौ जगाने वाले और जेल भरो आंदोलन की अलख जगाने वालों में वे अग्रणी रहे और वह दिन भी आ गया जब 1947 में देश आजाद हुआ और 1950 में जब भारत गणराज्य घोषित हुआ और चुनाव हुए तो वाराणसी पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से वे  विधायक भी चुने गए। बेचन लाल का 1976 में 76 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनके पौत्र प्रशांत गुप्त बताते हैं कि आज दादा जी भले ही नहीं हैं लेकिन उन्होंने क्षेत्र में आजादी की जो अलख जगाई उस पर केवल हमारे परिवार को ही नहीं भदोही जिले को भी गर्व है।
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