यह बातें जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डा. भीमराव अंबेडकर के 125वें जन्म दिवस समारोह पर कहीं।
उन्होंने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की मजबूत आधारशिला रखी। उनके बताए रास्ते एवं आदर्शों पर चलकर ही सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
उन्होंने अधिकारियों को संकल्प दिलाया कि सरकार की चलाई जा रही योजनाओं को लाभार्थी तक पहुंचाकर ही डा. अंबेडकर के आदर्शों को पूरा कर सकते हैं।
इसके पूर्व जिलाधिकारी ने डा. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर एडीएम रमाशंकर यादव सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
इसी तरह काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अंबेडकर छात्रावास में भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गई। इस दौरान वाद विवाद, आत्म विश्लेषण सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
छात्रावास की अधीक्षिका पूजा बी राव और अधीक्षक पंकज पटेल ने डा. भीमराव अंबेडकर के दलित उत्थान के योगदान पर प्रकाश डाला।
बेहतर प्रस्तुति देने पर छात्रा सुमन पाल, पुष्पा, सुमन मौर्य, संध्या भारती, गौरीशा सोनी, अनीता और छात्र सुनील कुमार, प्रेमचंद्र, विजेंद्र कुमार को पुरस्कृत किया गया।
प्रभारी प्राचार्य डा. भारतेंदु द्विवेदी और प्रवक्ता डा. कमाल अहमद सिद्दिकी ने छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाया। इसी तरह शिक्षा विभाग की ओर से अंबेडकर जयंती पर रैली निकालकर डा. भीमराव अंबेडकर के कार्यों पर प्रकाश डाला गया।
बीआरसी ज्ञानपुर से रैली को बीएसए डा. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर मनोज उपाध्याय सहित कई लोग मौजूद रहे।
घोसिया संवाददाता के अनुसार, वार्ड नंबर एक लोहिया नगर में राजेश कुमार के नेतृत्व में अंबेडकर जयंती मनाई गई। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद, कतवारू मास्टर, छोटे लाल मास्टर, ओम प्रकाश मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे।
वहीं, दूसरी ओर वार्ड नंबर दो गांधी नगर के अंबेडकर पार्क में दयाशंकर गौतम के नेतृत्व में अंबेडकर जयंती मनाई गई।
मुख्य अतिथि चेयरमैन नुमान अहमद रहे। मौके पर सुरेश कुमार, सभासद उषा देवी, प्रहलाद दास गौतम आदि मौजूद रहे।
सुरियावां संवाददाता के अनुसार, बावन बीघा तालाब बौद्ध विहार स्थल से बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर जुलूस निकाला गया।
जुलूस पूरे नगर का भ्रमण करने के बाद बौद्ध विहार स्थल पर आकर समाप्त हुआ। इसके बाद कार्यक्रम आयोजित का डा अंबेडकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। इसी तरह मनापुर, कौडर, कुसौड़ा, मलेपुर, मतेथू, कौआपुर में भी जयंती मनाई गई।