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शिक्षक दिवस विशेष

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शिक्षक दिवस में कंपोजिट विद्यालय बेजवां के हेडमास्टर समर बहादुर पटेल। संवाद - फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। आज शिक्षक दिवस है। कहानी ऐसे शिक्षकों की लाए हैं जिनके लिए अध्यापन पेशा नहीं, मिशन है। वे जहां जाते हैं, कुछ नया करके दिखाते हैं। तमाम ऐसे शिक्षक हैं जो दुश्वारियों के बीच कठिन परिश्रम कर नई पीढ़ी को नई दिशा देने में जुटे हैं। किताबी ज्ञान देने के साथ ही बच्चों को कंप्यूटर, संगीत, खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे शिक्षकों की मेहनत व लगन को सलाम जो समाज को नई दिशा तो दे ही रहे हैं साथ ही अन्य शिक्षकों के लिए मिसाल भी हैं। ज्ञानपुर। औराई के कंपोजिट विद्यालय बेजवां के हेडमास्टर समर बहादुर पटेल ने पिछड़े क्षेत्र में स्थित सरकारी स्कूल को सामुदायिक सहयोग से स्मार्ट बना दिया। 12 साल में ही स्कूल को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया। 2009 में तैनाती मिलने के बाद स्कूल के शैक्षिक, सामाजिक परिवेश को बदलने में जुट गए। वेतन से हर महीने स्कूल सहयोग के लिए पैसे रखा। साथ ही सामुदायिक सहयोग लिया। धीरे-धीरे स्कूल में कंप्यूटर लैब, विज्ञान लैब, प्रोजेक्टर, पेयजल के लिए 4500 लीटर की टंकी,, दो बड़े इन्वर्टर, संगीत से जुड़े सभी उपकरण संग अन्य सुविधाएं मुहैया कराईं। उन्होंने बताया कि स्कूल में सभी शिक्षकों का सहयोग मिलने से पठन-पाठन बेहतर हुआ। आज विद्यालय में 725 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें 650 प्रतिदिन आते हैं। उन्होंने कहा कि उनका बचपन गरीबी में गुजरा। शिक्षक बनने के बाद प्रण किया कि सरकारी स्कूल में कान्वेंट जैसी सुविधा दूंगा। ईश्वर की कृपा से आज उस मुकाम पर पहुंच गया हूं। इसके लिए जिला और मंडल स्तर पर पुरस्कृत हो चुका हैं। शासन स्तर पर भेजी जाने वाली राज्य पुरस्कार की सूची में नाम गया था, संयोगवश इस बार नहीं मिला। डभका स्कूल की लैब देखने आ चुुकी है एनसीईआरटी की टीम बच्चों के बेहतर पठन-पाठन और वैज्ञानिक सोच जागृत करने वाले कंपोजिट विद्यालय डभका के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मानिक चंद्र पाल किसी पहचान के मोहताज नहीं है। करीब एक दशक में कड़ी मेहनत और लगन से स्कूल की दशा बदल दी। उनके प्रयास से यहां पर बनी कंप्यूटर और विज्ञान लैब जिले की उत्कृष्ट लैब है। दो साल पूर्व एनसीईआरटी और यूनिसेफ की टीम भी लैब देखने के लिए आई थी। वीडियोग्राफी करने के साथ यहां के बच्चों से सवाल भी पूूछे। बच्चों की वैज्ञानिक सोच को देख टीम ने प्रशंसा भी की। हेडमास्टर संग अन्य शिक्षकों का सहयोग मिलने से एसएससी स्तर की राष्ट्रीय आय आधारित योग्यता परीक्षा में भी यहां के बच्चे झंडे गाड़ रहे हैं। 2015 से हर साल करीब 10 से 12 बच्चे परीक्षा को उत्तीर्ण कर स्कालरशिप लेकर आगे की पढ़ाई का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 2022 में भी 10 बच्चे चयनित हुए। भौतिक और शैक्षिक परिवेश बेहतर होने से अभिभावक कान्वेंट की बजाए यहां पर ही बच्चे का प्रवेश कराते हैं। संयुक्त निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार सिंह भी मानिक चंद्र पाल को सम्मानित कर चुके हैं। राज्य स्तर पर उत्कृष्ट पाठ्य योजना के लिए भी पुरस्कृत हो चुके हैं। परिषदीय स्कूलों में पिछले एक दशक में काफी बदलाव हुआ। शासन संग शिक्षकों की कड़ी मेहनत भी इसमें शामिल रहा। स्कूलों में शैक्षिक परिवेश को बदलने में कई शिक्षक शामिल हैं। इसमें कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय भुलईपुर के आशीष कुमार सिंह, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा की ज्योति, अंग्रेजी माध्यम स्कूल चककलूटी के विनोद कुमार, कंपोजिट विद्यालय चितईपुर के अरविंद कुमार पाल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय खेमईपुर में उर्मिला देवी, प्राथमिक विद्यालय पल्हैयां में दिनेश् चंद्र मौर्य, प्राथमिक विद्यालय हरियावं में हरिशंकर यादव, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नंदापुर में जेके सिंह आदि हैं। शिक्षण एक महान पेशा है जो किसी व्यक्ति के चरित्र, क्षमता और भविष्य को आकार देता है।

शिक्षक दिवस में कंपोजिट विद्यालय डभका के हेडमास्टर मानिक चंद्र पाल । संवाद- फोटो : BHADOHI

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