फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दबे पांव जिंदगी की डोर काट रही टीबी

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। जिले में ट्यूबरक्यूलॉसिस (टीबी) कोरोना वायरस से भी घातक बन गई है। दबे पांव जिंदगी की डोर काट रही टीबी कालीन नगरी में गंभीर रूप लेती जा रही है। बीते साल 2020 में कोरोना वायरस से जहां एक ओर जनपद में 38 लोगों की मौत हुई, वहीं दूसरी ओर टीबी ने 97 लोगों को निगल लिया। जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 70 हजार से अधिक टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच की जा चुकी है। जिसमें कुल 2091 लोगों में टीवी के लक्षण मिले हैं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि टीबी जानलेवा बीमारी तो है लेकिन असाध्य बिल्कुल नहीं। यहां अवगत करा दें कि केंद्र सरकार इस बीमारी के खात्मे के लिए 2025 तक का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मरीजों की जांच, नि:शुल्क दवाओं संग बेहतर खान-पान के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में 500 रुपये भी दिया जाता है। बावजूद इसके जिले में लगातार टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण पूर्व के वर्षों की तरह जांच नहीं हो सकी, लेकिन टीबी की रिकवरी दर कोरोना से भी खराब रही। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 2020 में एक लाख से अधिक लोगों की कोविड-19 की जांच हुई। जिसमें 2230 संक्रमित मिले। इसमें 2192 स्वस्थ होकर घर पहुंच गए जबकि 38 लोगों की मौत हो गई। वहीं 70 हजार संदिग्धों की जांच में टीबी के 2091 मरीज मिले और 97 की मौत हो गई। 2018 में 2102 और 2019 में 2208 टीबी के मरीज मिले थे जबकि 2021 में अब तक 481 मरीज मिल चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें