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Bhadohi News: टैरिफ, तुर्किये और तनाव, कालीन उद्योग की बड़ी चुनौती

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कारपेट एक्सपो के अंतिम दिन प्रेस वार्ता करते सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल। स्रोत-संवाद - फोटो : प्राथमिक विद्यालय भभोट परिसर के ऊपर से गई एचटी लाइन।
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ज्ञानपुर। 49वां अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला मंगलवार को संपन्न हो गया। मेला कितना सफल रहा, यह आने वाले समय में इसके जरिये होने वाले व्यापार से पता चलेगा। जिले में होने वाले चार सालों के कालीन मेले के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्टॉल व बॉयर तो कम होते ही रहे हैं। वहीं साल दर साल इससे होने वाले कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। बीते साल 500 करोड़ का कारोबार जेनरेट किए जाने का दावा किया गया था। इस बार भी सीईपीसी 240 करोड़ के कारोबार की उम्मीद जता रही है। कालीन उद्योग के लिए टैरिफ, तुर्किये और कई देशों के बीच तनाव एक बड़ी चुनौती बनी है। इस साल कालीन मेले में चारों दिन अमेरिकी टैरिफ को लेकर सवाल होते रहे। जिस स्टॉल पर फुटफाल अच्छे रहे, उन्होंने इसे ठीक बताया। वहीं कई स्टॉलों पर खरीदारों और उनके प्रतिनिधियों की पहुंच कम रही। ऐसे में मेले की सफलता किस स्तर तक रही, इसका सटीक आकलन काफी मुश्किल है। सीईपीसी बेहतर मेले का दावा कर रही है लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल के मुकाबले इस बार 100 स्टॉल, 100 बायर व 260 करोड़ का कारोबार कम रहा। सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने प्रेसवार्ता में बताया कि टैरिफ बड़ी चुनौती है। अमेरिका कालीन कारोबार का बड़ा हिस्सेदार है, इसलिए उसकी कमी को इतनी जल्दी पूरा नहीं किया जा सकता। वहीं कई देशों के बीच तनाव ने भी उद्योग पर असर डाला है। बीते कुछ वर्षों में इस्राइल-ईरान, रूस-यूक्रेन के अलावा अन्य युद्ध हुए हैं। इससे शिपिंग व हवाई यात्राएं प्रभावित हुई हैं। इससे कई निर्यातकों के माल देरी से पहुंचे। अमेरिकी टैरिफ से भी कई निर्यातकों के करोड़ों के माल होल्ड पड़े हैं। नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। दूसरी तरफ तुर्किये के मशीनमेड कालीन भारतीय कालीनों के लिए चुनौती बने हैं। बीते दिनों जिले के दौरे पर एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने भी तुर्किये के कालीनों पर टैरिफ लगाने की बात कहीं थी। कालीन निर्यातक संवर्धन परिषद के अनुसार बीते वर्षों में अलग-अलग देशों के साथ करीब 17740 करोड़ का कारोबार हुआ है, लेकिन इस साल अब तक पहली तिमाही में कारोबार की गति सुस्त रही है। आंकड़ों के अनुसार इस साल पहली तिमाही में अब तक केवल 512 करोड़ का व्यापार हो सका है। इसमें अमेरिका के साथ 298.51 करोड़ का व्यापार शामिल रहा है। इसके बाद सबसे अधिक 27.63 करोड़ का कारोबार यूके साथ हुआ है। निर्यातकों का मानना है कि पहली तिमाही में चुनौतियों के कारण व्यापार की गति सुस्त है। कालीन मेले से इसे गति मिलेगी।
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