वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन शुक्रवार को सरकारी दफ्तरों में मार्च क्लोजिंग के चक्कर में देर रात तक काम होता रहा। बजट खत्म करने के लिए फाइलों को फाइनल करने में कर्मचारी जुटे रहे। करीब सवा दो करोड़ मुआवजे की रकम जहां सरेंडर किया गया वहीं वन विभाग को मिले मनरेगा का 20 लाख वापस किया गया। कई विभागों का मिलाकर तीन करोड़ रुपये शासन को वापस किया गया।
केंद्र और प्रदेश सरकार की चल रही योजनाओं के लिए शासन से हर साल बजट मुहैया कराया जाता है। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह मार्च में उसका लेखाजोखा तैयार करने से लेकर बचे हुए बजट को शासन को भेज दिया जाता है। शुक्रवार देर रात तक विकास भवन, डीआईओएस कार्यालय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, श्रम विभाग, कलेक्ट्रेट परिसर में कर्मचारी विभिन्न मदों में आए धनराशि को खर्च करने के लिए फाइलों को फाइनल करने में लगे रहे। वित्त एवं कोषाधिकारी कार्यालय में कई विभागों की ओर से लेखाजोखा दिया गया लेकिन कई विभाग नहीं दे सके।
वित्त /लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने कहा कि बजट कम होने से शिक्षकों का एरियर नहीं दिया जा सका वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग में वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय का आया 11 लाख सरेंडर किया गया। अतिवृष्टि के लिए आए नौ करोड़ में पौने सात करोड़ रुपये वितरित किए गए, सवा दो करोड़ सरेंडर किया गया। ज्ञानपुर में एक करोड़ और भदोही में सवा करोड़ रुपये नहीं बंट सका। इसी तरह वन विभाग को मनरेगा के तहत मिले करीब 35 लाख में 20 लाख वापस किया गया।