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12वीं तक ‘नो योर कंट्री’ पाठ्यक्रम समाहित करने का सुझाव

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भदोही। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय द्वारा बीएचयू के एक भारत श्रेष्ठ भारत क्लब के सहयोग से चल रहे भारत की अमूर्त विरासत कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन के मुख्य अतिथि राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय अरुणाचल प्रदेश के कुलपति प्रो.साकेत कुशवाहा ने भारतीय संस्कृति का सुंदर एवं सरल शब्दों में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने के लिए 12वीं कक्षा तक ‘नो योर कंट्री’ नामक पाठ्यक्रम शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सरकार को लिखा भी है।
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प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो. बाला लखेंद्र ने योगा फिलासफी एवं आर्ट ऑफ लिविंग पर विचार व्यक्त किए। कहा कि भारत ने विश्व को योगा सिखाया। आज धीरे धीरे समस्त देश इसे अपना चुके हैं। इसके माध्यम से सभी देश स्वस्थ रहने के कारगर पहल कर पा रही हैं। आयोजक महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.मुरलीधर राम गुप्ता ने सभी सहभागियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया और उन्हें इलेक्ट्रानिक स्मृति चिन्ह भेंट किया। एक भारत श्रेष्ठ भारत बीएचयू के डीन तथा नोडल अफसर डा.एनके सिंह डा.आशीष उपाध्याय प्राचार्य पं.दीनदयाल उपाध्याय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सैदाबाद ने भी संबोधित किया।
कार्यशाला सचिव डा.बृजेश सिंह ने बताया कि कार्यशाला में देश के 22 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 460 प्रतिभागियों ने भाग लिया जो 7 दिन तक चला। समापन समारोह का संचालन डा. वर्षा रानी ने किया तथा डा.रुस्तम अली ने लोगों का स्वागत कर आभार जताया। समन्वयक डा.गौतम गुप्ता का योगदान भी सराहनी रहा।
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