गंगा के जलस्तर में दो दिन से घटाव का क्रम जारी है। बाढ़ का भय कम होने से लोगों में राहत है। दो दिन में अब तक 75 सेमी पानी घट चुका है। हालांकि कीचड़ और दुर्गंध ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जल भराव से करीब 500 बीघे से अधिक उरद और अरहर की फसल नष्ट हो चुकी है। लगभग एक हजार बीघे खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है। जलस्तर चार सेमी प्रति घंटे कम हो रहा है। गंगा का जल स्तर अब भी खतरे के निशान 80 मीटर से ऊपर है। करीब 10 दिनों तक गंगा के बढ़े जलस्तर से तटवर्ती 25 से 30 गांवों में हाहाकर मच गया। इटहरा, कलिकमवैया समेत अन्य गांव की कई बस्तियों में पानी घुस गया था। बृहस्पतिवार की सुबह से गंगा के जलस्तर में कमी आने लगा। शुक्रवार को जलस्तर में घटाव जारी रहा। बस्तियों से भी पानी अब धीरे- धीरे वापस होने लगा है लेकिन कीचड़ और दुर्गंध ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोनिया क्षेत्र के हरीरामपुर, कलिक मवैया, इटहरा, डीघ, आदि गांवों में किसानों की हजारों बीघा फसल में डूबी हुई है, लेकिन जलस्तर में कमी को देखते हुए तटीय गांवों के लोगों की मुश्किलें कम होने लगी है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो मंगलवार की रात में 80.940 मीटर के सापेक्ष जल स्तर शुक्रवार को 80.130 मीटर पर आ गया है। वर्तमान में चार सेमी प्रति घंटे की गति से पानी कम हो रहा है। इसी तरह रामपुर घाट सहित औराई तहसील के गांव के लोगों ने जलस्तर घटने से राहत की सांस ली।