ज्ञानपुर। ई-केवाईसी, तकनीकी खामी और भूमि अंकन न होने से 40 हजार से अधिक किसानों को सम्मान निधि की 14वीं किस्त नहीं मिल सकी है। इससे परेशान किसान राजकीय कृषि बीज भंडार से लेकर कृषि भवन घरांव का चक्कर लगा रहे हैं। कर्ज से डूबे किसानों के लिए केंद्रीय सरकार की ओर से दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरूआत की गई थी। इस योजना में प्रत्येक किसान को दो हजार रुपये प्रति वर्ष देने की व्यवस्था है। जिले में शुरुआती दौर में तो 1.78 लाख किसान ही पंजीकृत हुए थे, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर दो लाख 26 हजार तक पहुंच गई। केंद्रीय और प्रांतीय स्तर से फिल्टर होने के बाद 2021 में संख्या 1.91 लाख तक पहुंची। 2022 में जमीन का सत्यापन और ई-केवाईसी कराने के बाद बड़ी संख्या में अपात्र मिले। इससे लाभार्थियों की संख्या घटकर एक लाख 84 हजार पहुंच गई। जनवरी में 14वीं किस्त जारी होने तक एक लाख 44 हजार किसानों ने ई-केवाईसी और भूमि अंकन करा सके और उतने को ही लाभ मिल सका। धीरे-धीरे दो महीने से अधिक का समय गुजर गया, लेकिन वंचित 40 हजार किसान अब भी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। उप निदेशक डॉ. अश्वनी कुमार सिंह ने कहा कि राजकीय बीज गोदाम और कृषि भवन घरांव में काउंटर खोलकर कमियों को सुधारा जा रहा है। 15वीं किस्त के समय सभी का जोड़कर पैसा जाएगा। ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ जिले में बड़ी संख्या में अपात्र भी ले रहे थे। ई-केवाईसी और भूमि अंकन होने पर करीब 35 से 40 हजार ऐसे किसान मिले, जिनके पास या तो जमीन नहीं थी या वह सरकारी कर्मचारी रहे। 10वीं से 12वीं किस्त तक का लाभ लेने वाले ऐसे किसानों की सूची सत्यापन के बाद विभाग ने केंद्र सरकार को भेज दी है। उप निदेशक ने बताया कि जल्द ही इनकी सूची जारी होगी। उसके बाद उनसे सरकारी धन की वसूली की जाएगी।