ज्ञानपुर। जिले में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती के लिए शासन ने लक्ष्य निर्धारित किया है। इस साल जिले में तीन हेक्टेयर में स्ट्राबेरी की खेती की जाएगी। लक्ष्य निर्धारित होने के बाद उद्यान विभाग किसानों के चयन में जुट गया है। एकीकृत मिशन बागवानी योजना के तहत किसानों को खेती पर 40 फीसदी अनुदान मिलेगा।
जिले में तेजी से किसानों का एक तबका परंपरागत खेती को छोड़कर तकनीक आधारित खेती की ओर से कदम बढ़ा रहा है। उद्यान विभाग की ओर से भी इस तरह की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है और तकनीक आधारित खेती करने वाले किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर तकनीक आधारित खेती के फायदे बताए जा रहे हैं। जिले में अब तक औराई ब्लॉक के कुरौना गांव निवासी सीमांत मिश्रा चार बिस्वा में स्ट्राबेरी की खेती कर रहे थे। अब पहली बार इसके लिए शासन ने लक्ष्य निर्धारित किया है। तीन हेक्टेयर में स्ट्राबेरी की खेती होगी। इसमें किसानों को 40 फीसदी तक अनुदान मिलेगा। किसानों का चयन प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर किया जाएगा। उद्यान निरीक्षक धर्मेन्द्र मौर्या ने बताया कि स्ट्राबेरी की एक हेक्टेयर की खेती करने पर करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है। इससे किसान डबल मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में स्ट्राबेरी का एक फल 70 से 80 रुपये सीजन में बिकता है। किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा।
सत्यापन के बाद किसानों को मिलेगा अनुदान
धर्मेन्द्र मौर्या ने बताया कि परंपरागत खेती से हटकर व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों की आर्थिकी मजबूत हो रही है। बताया कि किसानों को अनुदान सत्यापन के बाद मिलेगा। स्ट्राबेरी यानि ड्रैगन फ्रूट है। इसके पौधे पर गुलाबी रंग के फल आते हैं। स्वादिष्ट होने के कारण इसे सुपर फूड भी कहा जाता है। इसमें आयरन, विटामिन, प्रोटीन मिलता है। इससे इम्यूनिटी बूस्ट, डायबिटीज को कम करने के साथ कोलेस्ट्रॉल के लिए भी लाभदायक है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए किसानों को लकड़ी या क्रंकीट के पिलरों की जरूरत होती है।
स्ट्राबेरी की खेती करके किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। जिले में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती का लक्ष्य मिला है। इसके लिए किसानों का चयन किया जा रहा है। किसानों को लागत का 40 फीसदी अनुदान मिलेगा। ममता सिंह यादव, डीएचओ भदोही।